आखिर कब से शुरू होगी बच्चों की स्कूल? जानें एम्स निदेशक गुलेरिया ने क्या कहा

डॉ.रणदीप गुलेरिया

विविध कंपनियाँ कर रही है बालकों के लिए टीके के ट्रायल की तैयारी, अधिकतर नागरिकों के टीकाकृत हो जाने के बाद ही स्कूलों के खेलने का लिया जाएगा निर्णय

जब से कोरोना महामारी का प्रारंभ हुआ है, बालकों का स्कूल जाना बंद हो गया है। लंबे समय से स्कूलों के बंद होने के कारण अब छात्र भी अपनी स्कूल को याद करने लगे है। ऐसे में सभी के बीच मात्र एक ही प्रश्न चल रहा है कि आखिर बालकों कि स्कूल कब से शुरू होगी? जिसका जवाब देते हुये अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्था (AIIMS) के प्रमुख डॉ रणदीप गुलेरिया ने एक बयान दिया है। डॉ रणदीप गुलेरिया ने कहा कि बालकों को कोरोना विरोधी वैक्सीन की उपलब्धता  एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। जिससे की स्कूल खुलने की संभावना बढ़ सकेगी। 
डॉ रणदीप ने कहा की भारत बायोटेक की कोवैक्सीन का 2 से 18 साल के बालकों के लिए किए गए दूसरे और तीसरे फेज के ट्रायल का परिणाम सितंबर तक में आ सकता है। जिसे अनुमति मिलने के बाद बालकों को भी वैक्सीन दिया जा सकेगा। इसके अलावा यदि उसके पहले फाइजर के टीके को अनुमति मिल गई तो वह भी बालकों के लिए एक विकल्प हो सकता है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा बताया गया कि जायडस केडीला की कोरोना विरोधी वैक्सीन जायकोव-डी को भी आपातकालीन इस्तेमाल के लिए अनुमति मिल सकती है। कंपनी का दावा है कि यह टीका व्यसक तथा बालक दोनों को दी जा सकती है। 
डॉ गुलेरिया ने बताया कि यदि जायडस के टीके को अनुमति मिलती है तो वह भी एक विकल्प रहेगा। बालकों में आम तौर पर कोरोना के सामान्य लक्षण देखने मिलते है, कई किस्सों में तो लक्षण देखने भी नहीं मिलते। डॉ गुलेरिया कहते है कि पिछले कई समय से सभी स्कूल बंद है, पर वह फिर से खुलेंगे। इसके लिए वैक्सीनेशन काफी अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। 
बता दे कि सरकार ने पहले ही लोगों को चेतावनी दे दी है कि अभी तक भले ही कोरोना वायरस ने अब तक बालकों को प्रभावित नहीं किया है। पर यदि वायरस का व्यवहार या महामारी कि गति में बदलाव आया तो स्थिति बदल सकती है। इसके पहले सरकार द्वारा यह भी कहा गया कि किसी भी परिस्थिति से लड़ने के लिए सरकार पूरी तरह से तैयार है। केंद्र सरकार ने पहले भी कहा था कि जब जनसंख्या के एक बड़े हिस्से को टीका लग जाएगा तभी फिर से स्कूल खोले जाएँगे। 

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