युवाओं में बढ़ रहा कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा, समय पर जांच जरूरी

युवाओं में बढ़ रहा कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा, समय पर जांच जरूरी

नई दिल्ली, 25 जून (वेब वार्ता)। कोरोनरी आर्टरी डिजीज (सीएडी), जिसे लंबे समय तक अधिक उम्र के लोगों की बीमारी माना जाता रहा है, अब तेजी से युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रही है।

हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार, 30 से 40 वर्ष की आयु के लोगों में धमनियों में गंभीर रुकावट और हार्ट अटैक के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आनुवंशिक प्रवृत्ति, निष्क्रिय जीवनशैली, लगातार तनाव, असंतुलित खानपान, तंबाकू सेवन तथा मधुमेह, मोटापा और उच्च कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं इसके प्रमुख कारण हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी के क्षेत्र में हुई प्रगति ने सीएडी के उपचार को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाया है। कोरोनरी एंजियोप्लास्टी जैसी प्रक्रियाएं अवरुद्ध धमनियों में रक्त प्रवाह को तेजी से बहाल कर हृदय की मांसपेशियों को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद करती हैं।

वहीं आधुनिक ड्रग-एल्यूटिंग स्टेंट्स धमनियों को खुला रखने के साथ-साथ दोबारा रुकावट बनने के जोखिम को भी कम करते हैं। स्टेंट तकनीक और इमेजिंग सिस्टम में हुए सुधारों से मरीजों की रिकवरी बेहतर हो रही है।

द हार्ट सेंटर, नई दिल्ली की सीनियर कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. समीना खलील ने कहा, आज की आधुनिक स्टेंट तकनीक और एंजियोप्लास्टी प्रक्रियाओं ने कोरोनरी आर्टरी डिजीज के उपचार के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है।

समय पर उपचार मिलने पर हम अक्सर अवरुद्ध धमनियों में रक्त प्रवाह को शीघ्र बहाल कर पाते हैं और मरीजों को सामान्य जीवन में लौटने में मदद कर सकते हैं।

हालांकि, उपचार कभी भी रोकथाम का विकल्प नहीं हो सकता।" उन्होंने कहा कि रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और रक्त शर्करा के स्तर की नियमित जांच, शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और तंबाकू से दूरी बनाए रखना हृदय स्वास्थ्य की सुरक्षा के सबसे प्रभावी उपाय हैं।