'रमन राघव 2.0' के 10 साल: सुनसान होटल में रहकर नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने की थी किरदार की तैयारी
मुंबई, 24 जून (वेब वार्ता)। हिंदी सिनेमा की चर्चित साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म 'रमन राघव 2.0' की रिलीज के 10 वर्ष पूरे हो गए हैं। अनुराग कश्यप के निर्देशन में बनी इस फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने सीरियल किलर रमन का ऐसा किरदार निभाया था, जिसे आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे खौफनाक और यादगार चरित्रों में गिना जाता है।
24 जून 2016 को रिलीज हुई इस फिल्म को इसकी डार्क स्टोरी, बेहतरीन निर्देशन और दमदार अभिनय के लिए दर्शकों तथा समीक्षकों की खूब सराहना मिली थी। हालांकि फिल्म की सबसे बड़ी ताकत नवाजुद्दीन सिद्दीकी का अभिनय माना गया, जिन्होंने एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका निभाई थी जो बिना किसी पछतावे या स्पष्ट कारण के हत्या करता है।
नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने इस किरदार की तैयारी के लिए बेहद अलग तरीका अपनाया था। उन्होंने बताया कि शूटिंग शुरू होने से तीन दिन पहले वह फिल्म की स्क्रिप्ट लेकर लोनावला चले गए थे और एक सुनसान इलाके के साधारण होटल में ठहरे थे। वहां उन्होंने खुद को पूरी तरह बाहरी दुनिया से अलग कर लिया था ताकि किरदार की मानसिकता को गहराई से समझ सकें।
नवाजुद्दीन ने बताया कि उन्होंने सभी संवाद याद कर लिए थे, लेकिन उनकी कोशिश किरदार में कुछ ऐसा जोड़ने की थी जो उसे अन्य खलनायकों से अलग बनाए। उन्होंने कहा था कि रमन की अपनी एक अलग सोच थी।
जहां अधिकांश लोग किसी कारण, विचारधारा या बदले की भावना से हत्या करते हैं, वहीं रमन के लिए हत्या करना एक सामान्य दैनिक क्रिया की तरह था। उन्होंने स्वीकार किया था कि इस किरदार की क्रूर मानसिकता और ईमानदारी को समझना उनके लिए आसान नहीं था।
उन्हें खुद को इस भूमिका के लिए मानसिक रूप से तैयार करने में कई दिन लगे। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और फिल्म में उनका प्रदर्शन दर्शकों के बीच लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा।
फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी के साथ विक्की कौशल ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। रिलीज के बाद फिल्म को आलोचकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और समय के साथ इसने एक मजबूत कल्ट फैन फॉलोइंग भी तैयार कर ली।
'रमन राघव 2.0' के 10 साल पूरे होने के अवसर पर यह फिल्म एक बार फिर याद दिलाती है कि किसी जटिल किरदार को पर्दे पर जीवंत बनाने के लिए कलाकार को कितनी गहराई तक जाना पड़ता है। नवाजुद्दीन सिद्दीकी का यह अभिनय आज भी समकालीन भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली प्रदर्शनों में शामिल माना जाता है।
