सूरत : विकसित भारत 2047’ की दिशा में बड़ा कदम है गुजरात औद्योगिक नीति-2026: जनक पच्चीगर

MSME, टेक्सटाइल, तकनीकी उन्नयन और सामाजिक समावेशन पर विशेष जोर; सूरत के उद्योगों को नई गति मिलने की उम्मीद

सूरत : विकसित भारत 2047’ की दिशा में बड़ा कदम है गुजरात औद्योगिक नीति-2026: जनक पच्चीगर

सूरत। औद्योगिक सलाहकार एवं अधिवक्ता जनक पच्चीगर ने गुजरात सरकार द्वारा घोषित औद्योगिक नीति-2026 का स्वागत करते हुए कहा कि यह नीति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

उनके अनुसार, नीति राज्य की वास्तविक औद्योगिक जरूरतों, राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक आर्थिक प्रवृत्तियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

पच्चीगर ने बताया कि नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 11 समर्पित क्षेत्र-विशेष समितियों का गठन किया गया है, जो विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुरूप मार्गदर्शन और नीति समर्थन प्रदान करेंगी।

उन्होंने कहा कि गुजरात की औद्योगिक अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) हैं और विशेष रूप से सूरत का टेक्सटाइल उद्योग इस नीति से सबसे अधिक लाभान्वित होने की स्थिति में है।

नीति के तहत MSME इकाइयों को पूंजी सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी और बिजली सब्सिडी के साथ-साथ गुणवत्ता प्रमाणन, ZED सर्टिफिकेशन, ERP एवं ICT सहायता, तकनीक अधिग्रहण, पेटेंट पंजीकरण, ऊर्जा और जल संरक्षण तथा बाजार विकास से संबंधित कई प्रोत्साहन उपलब्ध कराए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि नीति में SME एक्सचेंज के माध्यम से पूंजी जुटाने, पावर कनेक्शन शुल्क में राहत, किराया सहायता तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भागीदारी के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं।

सामाजिक समावेशन को नीति की एक महत्वपूर्ण विशेषता बताते हुए पच्चीगर ने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और दिव्यांग उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष सहायता योजनाएं शामिल की गई हैं।

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर योजना और भगवान बिरसा मुंडा योजना के अंतर्गत पात्र MSME इकाइयों को मार्जिन मनी सहायता के रूप में अतिरिक्त प्रोत्साहन उपलब्ध कराया जाएगा।

उन्होंने नीति में तालुका आधारित प्रोत्साहनों का उल्लेख करते हुए बताया कि श्रेणी ‘A’ (विकासशील) तालुकों में माइक्रो इकाइयों को पात्र स्थायी पूंजी निवेश (eFCI) पर 35 प्रतिशत तक परियोजना सहायता, 7 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी और पांच वर्षों तक प्रति यूनिट 2 रुपये बिजली सहायता मिलेगी।

वहीं श्रेणी ‘B’ (विकसित) तालुकों में माइक्रो इकाइयों को 25 प्रतिशत परियोजना सहायता, 7 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी और प्रति यूनिट 1 रुपये बिजली सहायता का लाभ मिलेगा।

पच्चीगर के अनुसार, नीति का उद्देश्य केवल नई इकाइयों की स्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीकी उन्नयन, ऊर्जा दक्षता, निर्यात क्षमता वृद्धि और प्रतिस्पर्धात्मक उत्पादन को बढ़ावा देना भी है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस नीति से सूरत और दक्षिण गुजरात में निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि बड़े और मेगा उद्योगों के लिए अलग प्रोत्साहन ढांचा प्रस्तावित किया गया है, जिससे राज्य में संतुलित और दीर्घकालिक औद्योगिक विकास सुनिश्चित होगा।