सूरत : ईटीपी प्लांट के टैंक में उतरे 4 सफाईकर्मियों की दम घुटने से मौत, सुरक्षा उपकरणों को लेकर बड़ी लापरवाही आई सामने

साथियों को बचाने के चक्कर में एक के बाद एक चारों समाए मौत के मुंह में, बिना पीपीई किट और ऑक्सीजन सिलेंडर के टैंक में उतारे गए थे मजदूर

सूरत : ईटीपी प्लांट के टैंक में उतरे 4 सफाईकर्मियों की दम घुटने से मौत, सुरक्षा उपकरणों को लेकर बड़ी लापरवाही आई सामने

सूरत। सूरत शहर के वराछा खांड बाजार क्षेत्र स्थित एक औद्योगिक इकाई में रविवार सुबह हुए दर्दनाक हादसे में चार सफाईकर्मियों की मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रतिह ज्वैलर्स परिसर में स्थित अंडरग्राउंड ETP (एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस के प्रभाव से चारों कर्मचारी बेहोश होकर अंदर फंस गए, जिससे उनकी जान चली गई।

घटना सुबह लगभग 10:22 बजे की है। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर चारों को बाहर निकाला। उन्हें तत्काल उपचार के लिए स्मीमेर अस्पताल भेजा गया, जहां चिकित्सकों ने सभी को मृत घोषित कर दिया।

मृतकों की पहचान निमेश विट्ठलभाई सावलिया (26, सुपरवाइजर), विकास कुमार संतोषभाई सोनावने (24), विजय भीखाभाई अहिरे (24) तथा योगेश नानाभाई जादव के रूप में हुई है।

एक दुसरे को बचाव की कोशिश में गई चारों की जान

प्रारंभिक जांच के अनुसार सबसे पहले योगेश टैंक की सफाई के लिए अंदर उतरे थे। उनके बेहोश होने के बाद विकास और विजय उन्हें बचाने के लिए टैंक में गए, लेकिन वे भी गैस की चपेट में आ गए। इसके बाद सुपरवाइजर निमेश सावलिया ने सहायता के लिए सूचना दी और स्वयं बचाव के लिए अंदर उतरे, जहां वे भी बेहोश होकर फंस गए। इस तरह एक के बाद एक चारों कर्मचारी हादसे का शिकार बन गए।

परिजनों के अनुसार, मृतक योगेश जादव का विवाह एक वर्ष पहले ही हुआ था और उनकी पत्नी गर्भवती हैं। घटना के समय उनके परिवार के अधिकांश सदस्य गांव गए हुए थे।

PPE किट और सुरक्षा उपकरणों का नहीं हुआ उपयोग

वराछा ज़ोन ‘ए’ के डिविजनल फायर ऑफिसर रणजीतसिंह खड़िया ने बताया कि मौके पर पहुंचने पर पता चला कि एक नहीं बल्कि चार लोग ETP टैंक के भीतर फंसे हुए थे। निरीक्षण के दौरान किसी भी कर्मचारी द्वारा PPE किट, सेफ्टी मास्क अथवा अन्य अनिवार्य सुरक्षा उपकरणों का उपयोग किए जाने के प्रमाण नहीं मिले। उन्होंने इसे प्रथम दृष्टया गंभीर लापरवाही बताया।

डीसीपी आलोक कुमार ने बताया कि यह टैंक ज्वेलरी प्रोसेसिंग के दौरान निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों के संग्रहण के लिए बनाया गया था, जिसकी नियमित सफाई की जाती थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सफाई के दौरान ऑक्सीजन सिलेंडर, गैस डिटेक्टर या सेफ्टी मास्क जैसे सुरक्षा उपकरणों का उपयोग नहीं किया गया।

पुलिस ने फैक्ट्री परिसर के CCTV फुटेज जब्त कर लिए हैं और यह जांच की जा रही है कि कर्मचारी किस परिस्थिति में टैंक में उतरे तथा हादसे के पीछे वास्तविक कारण क्या था। अधिकारियों का मानना है कि सुरक्षा मानकों के गंभीर उल्लंघन की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

डिप्टी फायर ऑफिसर प्रकाश इदावे ने बताया कि कंट्रोल रूम को सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति चैंबर में बेहोश हो गया है। मौके पर पहुंचने पर चार लोग स्लज क्लीनिंग चैंबर में फंसे पाए गए। फायर कर्मियों ने ऑक्सीजन उपकरणों की सहायता से सभी को बाहर निकाला और 108 एम्बुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

क्या है ETP प्लांट?

ETP (Effluent Treatment Plant) एक औद्योगिक अपशिष्ट जल शोधन प्रणाली है, जिसका उपयोग उद्योगों से निकलने वाले रासायनिक एवं प्रदूषित पानी को साफ कर पर्यावरण के अनुकूल बनाने या पुनः उपयोग योग्य बनाने के लिए किया जाता है। ऐसे टैंकों में जहरीली गैसों के जमा होने का खतरा बना रहता है, इसलिए सफाई कार्य के दौरान विशेष सुरक्षा उपाय अनिवार्य माने जाते हैं।

फिलहाल पुलिस, फायर विभाग और संबंधित एजेंसियां मामले की विस्तृत जांच कर रही हैं। हादसे ने औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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