सूरत : तेंदुए की खाल का एक करोड़ रुपये में सौदा तय, DRI और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में रैकेट का पर्दाफाश
सोशल मीडिया के जरिए हो रही थी डील; खाल पर मिले गोली के निशान, पेशेवर तरीके से उतारी गई चमड़ी ने संगठित शिकार गिरोह की आशंका बढ़ाई
सूरत। तेंदुए की खाल के अवैध कारोबार से जुड़े एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) और वन विभाग ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि तेंदुए की खाल का सौदा एक करोड़ रुपये में तय किया गया था। जब्त की गई खाल पर गोली के निशान और पेशेवर तरीके से की गई कटिंग मिलने के बाद वन विभाग को संगठित वन्यजीव तस्करी गिरोह के सक्रिय होने की आशंका है।
मामले की शुरुआत तब हुई जब एक प्रतिबंधित व्हाट्सएप ग्रुप में तेंदुए की खाल की तस्वीरें साझा कर उसे बिक्री के लिए उपलब्ध बताया गया। सोशल मीडिया और ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने वाली DRI की टीम तुरंत सक्रिय हुई और खरीदार बनकर आरोपियों से संपर्क किया। लंबी बातचीत और मोलभाव के बाद खाल की कीमत एक करोड़ रुपये तय की गई।
डील को अंजाम देने के लिए आरोपी बद्री अब्बास ने सूरत रेलवे स्टेशन क्षेत्र स्थित होटल अलंकार के कमरा नंबर 203 को चुना। वह एक ट्रॉली बैग में तेंदुए की खाल छिपाकर होटल पहुंचा।
तय योजना के अनुसार DRI अधिकारियों ने खरीदार बनकर उससे मुलाकात की और पंचों की मौजूदगी में छापा मारकर उसे रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। उसके कब्जे से बिना किसी वैध दस्तावेज के तेंदुए की खाल बरामद की गई।
मामला वन विभाग को सौंपे जाने के बाद डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (DCF) धीरज कुमार के मार्गदर्शन में विस्तृत जांच शुरू की गई। पूछताछ के दौरान बद्री अब्बास ने खुलासा किया कि वह केवल बिचौलिये के रूप में काम कर रहा था और खाल उसे मोइन हुसैन नामक व्यक्ति ने बिक्री के लिए दी थी। इस जानकारी के आधार पर वन विभाग ने पुलिस की सहायता से मोइन हुसैन को भी गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद मोइन हुसैन ने दावा किया कि खाल करीब 15 वर्ष पुरानी है और उसके पिता के पास सुरक्षित रखी गई थी। हालांकि वन्यजीव विशेषज्ञों ने खाल की स्थिति, चमक, नमी और संरचना के आधार पर इस दावे को खारिज कर दिया। प्रारंभिक विश्लेषण के अनुसार तेंदुए का शिकार संभवतः एक से दो महीने पहले किया गया था।
DCF धीरज कुमार ने बताया कि पहली नजर में खाल काफी ताजा प्रतीत होती है। विशेषज्ञों की राय के अनुसार तेंदुए को हाल के महीनों में शिकार कर उसकी खाल निकाली गई है।
वन विभाग की जांच में खाल पर गोली लगने के स्पष्ट निशान मिले हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि तेंदुए को गोली मारकर शिकार किया गया था। इसके अलावा खाल को अत्यंत पेशेवर तरीके से उतारा गया है, जो किसी अनुभवी शिकारी या तस्करी नेटवर्क की संलिप्तता की ओर इशारा करता है।
अधिकारियों के अनुसार इतनी सफाई से खाल निकालना किसी सामान्य व्यक्ति के बस की बात नहीं है। इससे संगठित वन्यजीव तस्करी सिंडिकेट की भूमिका की आशंका और मजबूत हुई है।
वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में दक्षिण गुजरात के जंगलों और ग्रामीण क्षेत्रों में तेंदुओं की संख्या में वृद्धि हुई है। इसी कारण वन्यजीव तस्करों और शिकारियों की नजर अब इस क्षेत्र पर टिक गई है। यह प्रवृत्ति वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।
तेंदुआ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में शामिल अत्यंत संरक्षित प्रजाति है। इस मामले में डुमास रेंज वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
वन विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें वन्यजीवों के अंगों की तस्करी या अवैध व्यापार से संबंधित कोई जानकारी मिले तो तत्काल विभाग को सूचित करें, ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
