सूरत : नई मेयर मायाबेन मावाणी की अनोखी पहल, गुलदस्तों की जगह किताबें और साड़ियां देने की अपील
पहले ही दिन जनहित के कार्यों की शुरुआत, जरूरतमंद बच्चों और वृद्ध महिलाओं की मदद के लिए उठाया कदम
सूरत। डायमंड और टेक्सटाइल सिटी के रूप में पहचान रखने वाले सूरत शहर से एक बार फिर सामाजिक संवेदनशीलता और जनहित से जुड़ी प्रेरणादायक पहल सामने आई है।
सूरत महानगरपालिका की नवनियुक्त मेयर मायाबेन मावाणी ने पद संभालते ही पारंपरिक राजनीतिक संस्कृति में बदलाव लाते हुए समाजोपयोगी पहल की शुरुआत की है। उन्होंने अपने शुभचिंतकों और समर्थकों से महंगे फूलों के गुलदस्तों की बजाय किताबें, नोटबुक, पेन और साड़ियां भेंट करने की अपील की है।
मेयर की इस पहल को शहरभर में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। शुक्रवार को मेयर कार्यालय में बधाई देने पहुंचे लोगों ने फूलों के बुके लाने के बजाय बड़ी संख्या में नोटबुक, कहानी की किताबें, पेन और साड़ियां भेंट कीं। मेयर मायाबेन मावाणी ने इन उपहारों को स्वीकार करने के साथ-साथ कार्यालय में विभिन्न प्रशासनिक फाइलों पर हस्ताक्षर कर नियमित कामकाज की भी शुरुआत की।
जरूरतमंद बच्चों और वृद्ध महिलाओं तक पहुंचेगी मदद
मेयर कार्यालय की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, भेंट में प्राप्त सभी सामग्री का उपयोग जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए किया जाएगा। बच्चों को दी जाने वाली नोटबुक, किताबें और पेन फुटपाथ, झुग्गी-झोपड़ी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को वितरित किए जाएंगे, ताकि उनकी शिक्षा में सहयोग मिल सके।
इसके अलावा, प्राप्त साड़ियों को शहर और आसपास के क्षेत्रों में स्थित वृद्धाश्रमों में रहने वाली निराश्रित महिलाओं को सम्मानपूर्वक भेंट किया जाएगा।
फुटपाथ पर दिखे एक बच्चे से मिली प्रेरणा
मेयर मायाबेन मावाणी ने बताया कि उन्हें इस पहल की प्रेरणा एक भावुक दृश्य से मिली। मेयर बनने के बाद पहले दिन जब वह घर लौट रही थीं, तब उन्होंने सड़क किनारे अपनी मां का हाथ पकड़कर मुस्कुराते हुए एक गरीब बच्चे को देखा।
उसी क्षण उन्हें एहसास हुआ कि हजारों रुपये के फूलों के गुलदस्ते कुछ घंटों में मुरझाकर कूड़ेदान में चले जाते हैं, जबकि उन्हीं पैसों से किसी जरूरतमंद बच्चे के हाथ में किताब पहुंचाई जाए तो उसका भविष्य संवारा जा सकता है।
मायाबेन मावाणी ने कहा, “फूलों के बुके कुछ समय बाद मुरझा जाते हैं, लेकिन किसी बच्चे के हाथ में किताब पहुंचती है तो उसके चेहरे की मुस्कान लंबे समय तक बनी रहती है।
मैंने तय किया कि मेरे स्वागत में फूलों के बजाय ऐसी चीजें दी जाएं जो समाज के किसी जरूरतमंद व्यक्ति के काम आ सकें। मेरा प्रयास है कि यह पद केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी तक सीमित न रहे, बल्कि समाज की जरूरतों और लोगों की खुशियों से भी जुड़ा रहे।”
मेयर की इस पहल को शहर में सामाजिक जागरूकता और जनसेवा की दिशा में एक सकारात्मक शुरुआत माना जा रहा है।
