सूरत : SGCCI के ‘माइंड एंड मनी’ सेमिनार में मानसिक स्वास्थ्य और आर्थिक संतुलन पर विशेषज्ञों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव
सोशल मीडिया के दौर में तुलना की प्रवृत्ति बढ़ा रही तनाव और असंतोष, पैसे को पहचान नहीं बल्कि साधन मानने की सलाह
सूरत : सदर्न गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (SGCCI) द्वारा नानपुरा स्थित समृद्धि भवन में “माइंड एंड मनी” विषय पर एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में प्रसिद्ध साइकेट्रिस्ट डॉ. तृप्ति पटेल और डॉ. मुकुल चोकसी ने मानसिक स्वास्थ्य, पैसे के प्रति सोच और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।
डॉ. तृप्ति पटेल ने कहा कि हर व्यक्ति के लिए पैसे का अर्थ अलग-अलग होता है। किसी के लिए यह मेहनत का प्रतीक है, किसी के लिए सुरक्षा का माध्यम और कुछ लोगों के लिए सामाजिक प्रतिष्ठा का आधार। उन्होंने कहा कि बचपन में मिली सीख और पारिवारिक सोच व्यक्ति के भविष्य के आर्थिक निर्णयों पर गहरा प्रभाव डालती है।
उन्होंने बताया कि कई लोग पैसे के माध्यम से समाज से स्वीकृति पाने की कोशिश करते हैं, जबकि कुछ लोग अधिक खर्च कर अपने भीतर की कमी को भरने का प्रयास करते हैं। भारतीय दर्शन के चार स्तंभों — धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि “अर्थ” का मतलब केवल धन कमाना नहीं, बल्कि संतुलित और संतोषपूर्ण जीवन जीना है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पैसे को केवल एक साधन के रूप में देखना चाहिए, किसी व्यक्ति की पहचान के रूप में नहीं।
डॉ. मुकुल चोकसी ने कहा कि आज के समय में व्यक्ति की पहचान काफी हद तक आर्थिक स्थिति और खर्च करने की क्षमता से जुड़ गई है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में लोग लगातार दूसरों से अपनी तुलना करते रहते हैं, जिससे मानसिक असंतोष और तनाव तेजी से बढ़ रहा है।
उन्होंने बताया कि कई लोगों को पैसे और भौतिक सुख-सुविधाओं से मिलने वाली “किक” की आदत हो जाती है। यह स्थिति यदि नियंत्रण से बाहर हो जाए तो डिप्रेशन, बाइपोलर डिसऑर्डर और OCD जैसी मानसिक समस्याएं बढ़ सकती हैं।
डॉ. चोकसी ने कहा कि बचपन से ही लोगों के मन में यह धारणा बैठा दी जाती है कि केवल पैसे से ही खुशी और शांति मिल सकती है। लेकिन जब वास्तविक जीवन में यह उम्मीद पूरी नहीं होती, तब व्यक्ति निराशा और मानसिक तनाव का शिकार हो जाता है।
उन्होंने भविष्य में मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन के लिए विशेष काउंसलिंग सेंटरों की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
सेमिनार के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में उपस्थित लोगों ने मानसिक स्वास्थ्य और आर्थिक तनाव से जुड़े सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से समाधान किया।
