सूरत में डिजिटल जनगणना से पहले प्रशासन की बढ़ी चिंता

कर्मचारियों की कमी और ड्यूटी से बचने की कोशिशों ने बढ़ाई मुश्किलें, 1 जून से शुरू होना है 50 दिवसीय अभियान

सूरत में डिजिटल जनगणना से पहले प्रशासन की बढ़ी चिंता

सूरत। देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया मानी जा रही डिजिटल जनगणना शुरू होने से पहले ही सूरत प्रशासन गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है।

1 जून से शुरू होने वाली 50 दिन की जनगणना प्रक्रिया से पहले कर्मचारियों की भारी कमी और कई कर्मचारियों द्वारा ड्यूटी से बचने की कोशिशों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

सूत्रों के अनुसार, शहर में जनगणना कार्य के लिए करीब 15,800 कर्मचारियों की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में लगभग 2,300 कर्मचारियों की कमी बनी हुई है।

इसके अलावा, पहले से नियुक्त और प्रशिक्षण प्राप्त 900 से अधिक कर्मचारियों ने विभिन्न कारणों से ड्यूटी से छूट के लिए आवेदन किया है। इनमें करीब 190 कर्मचारी ऐसे बताए जा रहे हैं, जिन्होंने किसी भी परिस्थिति में जनगणना कार्य नहीं करने की मंशा जाहिर की है और छोटे-बड़े कारण बताकर ड्यूटी से बचने का प्रयास किया है।

प्रशासन को यह शिकायतें भी मिली हैं कि कुछ राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारी भी जनगणना कार्य से दूरी बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में प्रशासन अब बिना उचित कारण ड्यूटी से बचने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

85 लाख आबादी के अनुमान के बीच बड़ा ऑपरेशन

सूरत शहर की तेजी से बढ़ती आबादी को देखते हुए इस बार की डिजिटल जनगणना को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अनुमान है कि शहर की आबादी अब 85 लाख के करीब पहुंच चुकी है। शहर की लगभग 18 लाख आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों में घर-घर जाकर पूरी तरह डिजिटल माध्यम से जानकारी एकत्र करने का कार्य किया जाएगा।

शुरुआत में करीब 10 हजार कर्मचारियों को ड्यूटी ऑर्डर जारी किए गए थे, लेकिन क्षेत्र और जनसंख्या को देखते हुए संख्या बढ़ाकर 14,800 कर दी गई। इसके साथ 10 प्रतिशत रिजर्व स्टाफ भी रखा गया है। अब तक करीब 12 हजार एन्यूमरेटर और 2 हजार सुपरवाइजर को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, फिर भी आवश्यक संख्या पूरी नहीं हो पाई है। कमी को पूरा करने के लिए विभिन्न सरकारी विभागों से अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई है।

900 कर्मचारियों ने मांगी छूट

प्रशासन को मिली 900 से अधिक छूट संबंधी अर्जियों में स्वास्थ्य, पारिवारिक परिस्थितियां और अन्य व्यक्तिगत कारण बताए गए हैं। हालांकि, प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि केवल गंभीर और वैध कारणों के आधार पर ही ड्यूटी से छूट दी जाएगी। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि सरकारी कार्य में लापरवाही या ड्यूटी से बचने की कोशिश करने वालों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

दिव्यांग और गर्भवती कर्मचारियों के आदेश रद्द

जनगणना ड्यूटी के लिए जल्दबाजी में जारी आदेशों में दिव्यांग और गर्भवती कर्मचारियों को भी शामिल कर लिया गया था, जिस पर विवाद खड़ा हो गया। शिकायतों के बाद प्रशासन ने मामले की समीक्षा की और पाया कि कुल 335 दिव्यांग एवं गर्भवती कर्मचारियों को फील्ड ड्यूटी सौंपी गई थी।

अब प्रशासन ने इन सभी कर्मचारियों के आदेश रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और उनकी जगह नए कर्मचारियों की नियुक्ति की जा रही है। इस फैसले के बाद संबंधित कर्मचारियों में राहत की भावना देखी जा रही है।