सूरत : मलेरिया नियंत्रण के लिए एआई और क्लाइमेट रिसर्च का बड़ा कदम
अमेरिकी रिसर्च संस्थान के साथ मिलकर सूरत में शुरू हुआ हाईटेक प्रोजेक्ट, मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों पर होगी हाइपर-लोकल मॉनिटरिंग
सूरत। सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन अब मलेरिया और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों के खिलाफ लड़ाई में ग्लोबल मॉडल बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
जलवायु परिवर्तन और तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण के कारण बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों को देखते हुए नगर निगम ने आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय रिसर्च के सहारे महामारी नियंत्रण की नई रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है।
इसी कड़ी में अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्था नेशनल इंस्टिट्युट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) ने सूरत शहर में शहरी मलेरिया के प्रसार पर तापमान और हवा में नमी के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए विशेष रिसर्च प्रोजेक्ट शुरू किया है।
इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य यह समझना है कि बदलते मौसम और क्लाइमेट पैटर्न का मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों पर कितना असर पड़ रहा है।
म्युनिसिपल कमिश्नर की अध्यक्षता में हुई हाई-लेवल समीक्षा बैठक
इस अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट की प्रगति की समीक्षा के लिए सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के म्युनिसिपल कमिश्नर एम. नागराजन की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय वार्षिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में भारत और अमेरिका के वैज्ञानिकों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक में शहरी मलेरिया ट्रांसमिशन के लिए “थर्मल सूटेबिलिटी” यानी तापमान और नमी की अनुकूलता को लेकर अब तक की रिसर्च, डेटा एनालिसिस और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
एआई आधारित मॉडलिंग से होगी मलेरिया की लाइव ट्रैकिंग
बैठक को संबोधित करते हुए म्युनिसिपल कमिश्नर एम. नागराजन ने कहा कि महामारी नियंत्रण के लिए अब केवल पारंपरिक तरीके पर्याप्त नहीं हैं। आधुनिक शहरों में स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक रिसर्च और डेटा आधारित निर्णय बेहद जरूरी हो गए हैं।
उन्होंने कहा कि नगर निगम अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित डेटा एनालिसिस पर विशेष ध्यान दे रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत एक “हाइपर-लोकल क्लाइमेट रिस्क असेसमेंट मॉडल” विकसित किया जा रहा है, जिसकी मदद से शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में मच्छरों के पनपने के संभावित जोखिम का लाइव विश्लेषण किया जा सकेगा।
किस इलाके में बढ़ सकता है मच्छरों का खतरा, पहले ही मिल जाएगी जानकारी
इस नई तकनीक के जरिए यह पता लगाया जा सकेगा कि शहर के किस इलाके, सोसाइटी या ज़ोन में तापमान और नमी का स्तर मच्छरों के लिए अनुकूल बन रहा है। इससे स्वास्थ्य विभाग को पहले से अलर्ट मिलने के साथ-साथ समय रहते रोकथाम के कदम उठाने में मदद मिलेगी।
नगर निगम का मानना है कि यह प्रोजेक्ट भविष्य में न केवल सूरत बल्कि देश के अन्य बड़े शहरों के लिए भी एक प्रभावी मॉडल साबित हो सकता है।
