सूरत नगर निगम को 28 मई को मिलेगा नया मेयर, पहली जनरल बोर्ड बैठक में होंगे अहम चुनाव
स्टैंडिंग कमेटी चेयरमैन समेत प्रमुख पदाधिकारियों के चयन पर सबकी नजर, भाजपा में दावेदारों की लंबी कतार से बढ़ी राजनीतिक हलचल
सूरत। सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के नए पदाधिकारियों के चुनाव को लेकर जारी इंतजार अब खत्म होने की ओर है। नगर निगम की पहली जनरल बोर्ड बैठक 28 मई को होने की संभावना है, जिसमें शहर को नया मेयर, डिप्टी मेयर और स्टैंडिंग कमेटी चेयरमैन सहित 12 सदस्यो को नाम घोषित होंगे। इसके साथ ही नगर निगम की अन्य महत्वपूर्ण कमेटियों के गठन की प्रक्रिया भी शुरू होगी।
नगर निगम चुनाव के परिणाम 28 अप्रैल को घोषित हुए थे। 120 सीटों में से भाजपा ने रिकॉर्ड 115 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि आम आदमी पार्टी को 4 और कांग्रेस को केवल 1 सीट मिली थी। भारी बहुमत मिलने के बावजूद अब तक मेयर, डिप्टी मेयर और अन्य पदाधिकारियों की घोषणा नहीं होने से राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, देरी की सबसे बड़ी वजह भाजपा के भीतर दावेदारों की बड़ी संख्या और विभिन्न सामाजिक व क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की चुनौती मानी जा रही है।
पार्टी नेतृत्व के सामने वराछा, कटारगाम, रांदेर, अठवा और उधना-लिंबायत जैसे क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व के साथ-साथ जातिगत और वरिष्ठता के संतुलन को बनाए रखने की चुनौती है। लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी किसी भी वर्ग या क्षेत्र में असंतोष नहीं चाहती, इसलिए हर नाम पर सावधानी से विचार किया जा रहा है।
पार्टी ने मेयर, डिप्टी मेयर और स्टैंडिंग कमेटी चेयरमैन जैसे अहम पदों के लिए मई की शुरुआत में ही “सेंस” प्रक्रिया पूरी कर ली थी। क्षेत्रीय पर्यवेक्षकों ने सूरत पहुंचकर संगठन पदाधिकारियों और निर्वाचित पार्षदों से राय ली थी। माना जा रहा है कि इस बार भी पार्टी “नो-रिपीट फॉर्मूला” अपनाकर नए और शिक्षित चेहरों को मौका दे सकती है।
गुजरात प्रोविंशियल म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (जीपीएमसी) एक्ट के अनुसार, चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद नगर आयुक्त पहली जनरल बोर्ड बैठक बुलाते हैं। नियमों के मुताबिक इस बैठक की अध्यक्षता नगर आयुक्त करेंगे।
सूत्रों के अनुसार, प्रशासन ने 28 मई को पहली जनरल बोर्ड बैठक आयोजित करने की आंतरिक तैयारी शुरू कर दी है। बैठक के दौरान गांधीनगर से पार्टी का अंतिम “जनादेश” सीलबंद लिफाफे में पहुंचने की संभावना है, जिसके बाद नए मेयर और डिप्टी मेयर के नामों की औपचारिक घोषणा की जाएगी।
नगर निगम में मेयर पद के अलावा स्टैंडिंग कमेटी चेयरमैन और उसके 12 सदस्यों की नियुक्ति भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। करोड़ों रुपये के बजट वाले सूरत महानगर में सड़क, ड्रेनेज, ब्रिज, पानी सप्लाई और अन्य विकास परियोजनाओं के टेंडर और मंजूरी का अंतिम अधिकार स्टैंडिंग कमेटी के पास होता है।
इसके अलावा हेल्थ कमेटी, टाउन प्लानिंग कमेटी, लॉ कमेटी और पब्लिक वर्क्स कमेटी समेत 10 से अधिक समितियों का गठन भी आगामी दिनों में किया जाएगा। इन समितियों के गठन के बिना नगर निगम के कई प्रशासनिक निर्णय और विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
राज्य के अन्य नगर निगमों में भी पदाधिकारियों की नियुक्ति लंबित होने के कारण संभावना जताई जा रही है कि पार्टी हाईकमान सभी शहरों के पदाधिकारियों की सूची एक साथ जारी कर सकता है।
गौरतलब है कि सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन का प्रशासनिक कार्यकाल मार्च में समाप्त हो गया था और उसके बाद प्रशासनिक नियंत्रण में चुनाव प्रक्रिया पूरी कराई गई। अब जनता के स्पष्ट जनादेश के बाद शहर को जल्द स्थायी जनप्रतिनिधि नेतृत्व मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
