ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर पीएम मोदी ने दी वीर जवानों को सलामी

रणनीतिक सक्रियता से भारत ने बदला राष्ट्रीय सुरक्षा का ढांचा, अत्याधुनिक तकनीक और एआई से सेना बनी और भी ताकतवर

ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर पीएम मोदी ने दी वीर जवानों को सलामी

नई दिल्ली, 07 मई (वेब वार्ता)। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के एक सफल वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय सशस्त्र बलों के अदम्य साहस और बलिदान को नमन किया है।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि के सम्मान में प्रधानमंत्री सहित मंत्रिमंडल के प्रमुख सदस्यों ने अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल पिक्चर बदलकर भारतीय तिरंगे के साथ केसरिया ज्वाला को एकीकृत किया है, जो सेना के संकल्प का प्रतीक है।

पीएम मोदी ने कहा कि यह ऑपरेशन आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस अभियान ने भारतीय सेना की पेशेवर तैयारी और तीनों सेवाओं के बीच सटीक समन्वय को वैश्विक पटल पर मजबूती से स्थापित किया है।

पिछले एक साल में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से सीख लेते हुए अपनी सैन्य रणनीति में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। सुरक्षा बलों ने अब ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। वायु सेना के पूर्व अधिकारियों के अनुसार, दुश्मन के उन्नत ड्रोन हमलों और दुष्प्रचार अभियानों का मुकाबला करने के लिए भारत ने अपनी ‘ड्रोन-रोधी’ क्षमताओं को विस्तारित किया है।

इस दौरान एस-400 मिसाइल प्रणाली और स्वदेशी ‘आकाश’ प्रणालियों के आक्रामक उपयोग ने हवाई सुरक्षा को अभेद्य बनाया है। भारत अब रणनीतिक संयम के बजाय ‘रणनीतिक सक्रियता’ की ओर बढ़ चुका है, जो दुश्मन के किसी भी परमाणु खतरे या उकसावे का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है।

राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति को पुनर्परिभाषित करते हुए सरकार ने सैन्य आधुनिकीकरण के लिए भारी-भरकम बजट और खरीद परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इसमें फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद, अमेरिका से बोइंग P8-I निगरानी विमान और जर्मनी के सहयोग से छह स्टील्थ पनडुब्बियों का निर्माण शामिल है।

हाल ही में भारत ने आईएनएस अरिदमन जैसी परमाणु पनडुब्बियों और अग्नि-5 जैसी बैलिस्टिक मिसाइलों का सफल परीक्षण कर अपनी सामरिक पहुंच को एशिया और यूरोप के बड़े हिस्सों तक विस्तारित किया है। 2.38 लाख करोड़ रुपये के नए सैन्य उपकरणों की मंजूरी यह दर्शाती है कि भारत भविष्य के किसी भी बहु-क्षेत्रीय युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है।