यूएई के हटने के बाद ओपेक प्लस का बड़ा फैसला: जून से कच्चे तेल के उत्पादन में होगी 1.88 लाख बैरल प्रतिदिन की बढ़ोतरी
वैश्विक बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने की कवायद
वियना/दुबई, 04 मई (वेब वार्ता)। ग्लोबल ऑयल मार्केट में जारी उथल-पुथल के बीच रविवार को तेल उत्पादक देशों के समूह ‘ओपेक प्लस’ (ओपीईसी+) ने कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर एक क्रांतिकारी फैसला लिया है।
संगठन ने घोषणा की है कि जून महीने से सदस्य देश संयुक्त रूप से 1.88 लाख बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) अतिरिक्त तेल का उत्पादन करेंगे। यह निर्णय संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) द्वारा संगठन से बाहर होने के आधिकारिक ऐलान के ठीक बाद आया है।
यूएई के जाने के बाद सऊदी अरब, रूस, इराक और कुवैत सहित सात प्रमुख देशों ने बाजार में तेल की किल्लत को रोकने और कीमतों पर लगाम लगाने की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ओपेक प्लस का यह कदम केवल आपूर्ति बढ़ाना नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार में अपनी पकड़ और स्थिरता का प्रदर्शन करना भी है।
यह फैसला ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में लिया गया है जब ईरान द्वारा ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ पर की गई नाकेबंदी के कारण दुनिया भर में तेल निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के बाद से ही तेल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि का डर बना हुआ था। विश्लेषकों का मानना है कि इस अतिरिक्त उत्पादन के जरिए समूह दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि संगठन आज भी तेल बाजार की दिशा तय करने में सक्षम है।
ओपेक प्लस के इस फैसले से भारत जैसे बड़े आयातक देशों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। चूंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की अधिक उपलब्धता कीमतों को स्थिर रखने में मदद करेगी।
यदि उत्पादन सुचारू रूप से बढ़ता है, तो घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दामों में होने वाली संभावित बढ़ोतरी को रोका जा सकेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम भारतीय उपभोक्ताओं के लिए महंगाई के मोर्चे पर एक शुभ संकेत है, जिससे परिवहन और माल ढुलाई की लागत में स्थिरता बनी रहेगी।
