आम आदमी पार्टी में ऐतिहासिक टूट: राघव चड्ढा समेत सात सांसदों ने छोड़ा केजरीवाल का साथ, भाजपा में हुए शामिल

अन्ना आंदोलन से उपजी पार्टी के वजूद पर गहराया संकट

आम आदमी पार्टी में ऐतिहासिक टूट: राघव चड्ढा समेत सात सांसदों ने छोड़ा केजरीवाल का साथ, भाजपा में हुए शामिल

नई दिल्ली, 25 अप्रैल (वेब वार्ता)। आम आदमी पार्टी (आप) के लिए 24 अप्रैल 2026 का दिन किसी काले अध्याय से कम नहीं रहा। पार्टी के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अपने छह अन्य साथी सांसदों के साथ आधिकारिक तौर पर ‘आप’ से नाता तोड़ लिया है।

चड्ढा के साथ संदीप पाठक, अशोक मित्तल, स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सहनी ने भी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया।

इसे साल 2012 में पार्टी के गठन के बाद से अब तक की सबसे बड़ी टूट माना जा रहा है। इन सांसदों के जाने से न केवल राज्यसभा में पार्टी की ताकत कम हुई है, बल्कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

भ्रष्टाचार के खिलाफ रामलीला मैदान से शुरू हुए आंदोलन की उपज रही इस पार्टी ने पिछले 14 वर्षों में कई बड़े चेहरों को खोया है। संस्थापक सदस्य प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव ने साल 2015 में ही पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र और फंडिग पर सवाल उठाकर दूरियां बना ली थीं।

इसके बाद शाजिया इल्मी, कुमार विश्वास, आशुतोष और कपिल मिश्रा जैसे नेताओं ने भी एक-एक कर साथ छोड़ दिया। किसी ने तानाशाही का आरोप लगाया तो किसी ने विचारधारा से भटकाव को कारण बताया।

आज के घटनाक्रम ने सिद्ध कर दिया है कि संस्थापक सदस्यों से शुरू हुआ असंतोष अब वर्तमान नेतृत्व के सबसे भरोसेमंद सिपहसालारों तक पहुँच चुका है।

पार्टी छोड़ने वाले नेताओं का मुख्य तर्क अक्सर एक ही रहा है—’पार्टी में स्वराज की कमी और एक व्यक्ति केंद्रित सत्ता’। योगेंद्र यादव ने जहाँ कामकाज के तरीके को ‘पुरानी पार्टियों जैसा’ बताया था, वहीं राघव चड्ढा और अन्य सांसदों का भाजपा में जाना संकेत देता है कि पंजाब और दिल्ली की सत्ता के बीच पार्टी के भीतर भारी अंतर्द्वंद चल रहा है।

अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से निकली पार्टी आज खुद को अपने ही मजबूत स्तंभों के ढहने से बचाने के लिए संघर्ष कर रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी टूट के बाद आगामी चुनावों में ‘आप’ के लिए अपनी साख बचाना एक बड़ी चुनौती होगी।