सूरत : स्वामीनारायण गुरुकुल में फूलों से सजी ठाकोरजी की वाघा, श्रद्धा और सेवा का अनूठा संगम
भीषण गर्मी में संतों, युवाओं और महिला भक्तों ने सुबह से दोपहर तक तैयार की रंग-बिरंगी पुष्प वेशभूषा
सूरत के वेड रोड स्थित श्री स्वामीनारायण गुरुकुल में गर्मी के मौसम के अवसर पर भगवान श्री स्वामीनारायण की सेवा में श्रद्धा और भक्ति का अनूठा उदाहरण देखने को मिला। यहां संतों, पूर्व छात्रों, भक्तों और महिला श्रद्धालुओं ने मिलकर फूलों की कलियों और पंखुड़ियों से भगवान के लिए आकर्षक वाघा (वस्त्र) तैयार किया।
सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक चले इस सेवा कार्य में डॉलर, मोगरा, चमेली, गुलाब, ऑर्किड और जरबेरा जैसे सुगंधित फूलों का उपयोग कर रंग-बिरंगे डिजाइनों में वाघा बनाई गई। यह सेवा वैष्णव परंपरा के ‘जैसी देह वैसी सेवा’ सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें भक्त मौसम के अनुरूप भगवान की सेवा कर उन्हें प्रसन्न करने का भाव रखते हैं।
गुरुकुल के संतों ने बताया कि जिस प्रकार मनुष्य अपनी मौसमी आवश्यकताओं के अनुसार जीवनशैली अपनाता है, उसी प्रकार भगवान की सेवा भी ऋतु के अनुरूप की जाती है। गर्मी के मौसम में भगवान को ठंडक प्रदान करने हेतु फूलों और चंदन से विशेष श्रृंगार किया जाता है।
पूजारी विवेकस्वरूपदासजी स्वामी के मार्गदर्शन में संतों और भक्तों ने ठाकोरजी के लिए सुंदर पुष्प वेशभूषा तैयार की। इस सेवा में विवेकस्वरूप स्वामी, विश्वस्वरूप स्वामी, निर्मल स्वामी, सरजू स्वामी, आत्मीयस्वरूप स्वामी, प्रेमस्वरूप स्वामी, श्रेयस्वरूप स्वामी, राधारमण स्वामी, हरिकीर्तन स्वामी सहित अनेक संतों, पार्षदों, युवाओं और महिला श्रद्धालुओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
गर्मियों के चार महीनों के दौरान स्वामीनारायण संप्रदाय में भगवान को सुगंधित फूलों की माला, बाजूबंद, कंगन, मुकुट और अन्य आभूषणों से सजाने की परंपरा है। साथ ही, फूलों की सजावट से संबंधित भजनों और वंदन पदों का गायन भी किया जाता है, जो लगभग 200 वर्ष पूर्व संतों द्वारा रचित हैं।
इस अवसर पर महंत स्वामी धर्मवल्लभदासजी स्वामी एवं अन्य संतों द्वारा भजन-कीर्तन प्रस्तुत कर भगवान को प्रसन्न किया गया, जिससे पूरे परिसर में भक्ति और आनंद का वातावरण छा गया।
