सूरत एयरपोर्ट के साथ अन्याय? बैंकॉक फ्लाइट बंद, इंटरनेशनल कनेक्टिविटी पर सवाल
1 जुलाई से सूरत-बैंकॉक सेवा बंद, घटती फ्लाइट्स से यात्रियों और व्यापार जगत में नाराज़गी
सूरत। सूरत एयरपोर्ट को लेकर एक बार फिर निराशाजनक खबर सामने आई है। 1 जुलाई, 2026 से सूरत-बैंकॉक के बीच संचालित होने वाली फ्लाइट सेवा पूरी तरह बंद होने जा रही है।
एयर इंडिया एक्सप्रेस ने इस रूट पर बुकिंग बंद कर दी है और इसके पीछे लगातार हो रहे घाटे को कारण बताया गया है। इस फैसले से यात्रियों और व्यापार से जुड़े लोगों में असंतोष देखने को मिल रहा है।
जानकारी के अनुसार, कुछ समय पहले तक सूरत एयरपोर्ट से पांच इंटरनेशनल फ्लाइट्स संचालित हो रही थीं, जिनमें बैंकॉक, दुबई और शारजाह जैसे प्रमुख रूट शामिल थे।
हालांकि, पिछले कुछ महीनों में इनमें से तीन फ्लाइट्स बंद हो चुकी हैं। अब जुलाई 2026 से सूरत एयरपोर्ट से केवल दो इंटरनेशनल फ्लाइट्स ही बचेंगी, जो मुख्यतः दुबई रूट पर आधारित होंगी।
सूरत-बैंकॉक फ्लाइट सप्ताह में चार दिन संचालित होती थी और यह रूट पर्यटन व व्यापार दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता था। इसके बंद होने से यात्रियों को अब वैकल्पिक शहरों से यात्रा करनी पड़ेगी, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ेंगे।
स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का मानना है कि सूरत जैसे तेजी से विकसित हो रहे महानगर के साथ हवाई सेवाओं के मामले में न्याय नहीं हो रहा है। बीते कुछ वर्षों में हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता, गोवा और शारजाह जैसे कई महत्वपूर्ण रूट्स बंद किए जा चुके हैं, जबकि अन्य रूट्स की फ्रीक्वेंसी भी घटाई गई है।
गौरतलब है कि सूरत की आबादी लगभग 90 लाख के आसपास है और यह देश के प्रमुख औद्योगिक एवं व्यापारिक केंद्रों में शामिल है। इसके बावजूद एयर कनेक्टिविटी में लगातार गिरावट चिंता का विषय बनी हुई है।
आंकड़ों के अनुसार, सूरत एयरपोर्ट पर औसतन 85 प्रतिशत तक यात्री भार (ऑक्यूपेंसी) रहता है, जबकि कई फ्लाइट्स में यह आंकड़ा 90 प्रतिशत तक पहुंच जाता है।
ऐसे में स्पष्ट है कि शहर में यात्रियों की कमी नहीं है, बल्कि पर्याप्त उड़ान सेवाओं का अभाव है। यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सूरत की अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी और कमजोर हो सकती है, जिसका सीधा असर शहर के व्यापार और विकास पर पड़ सकता है।
