Zell Education के साथ CFA, FRM, ACCA & CMA की शुरुआत करें

Zell Education के साथ CFA, FRM, ACCA & CMA की शुरुआत करें

नई दिल्ली, मार्च 25: अगर आप फाइनेंस में करियर बनाने की सोच रहे हैं तो दो नाम आपने ज़रूर सुने होंगे: ACCA और CFA। दोनों पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं, और दोनों ही क्वालिफिकेशन बड़ी कंपनी में नौकरी पाने में मदद करती हैं और दोनों के लिए मेहनत भी खूब करनी पड़ती है।

लेकिन सच यह है कि दोनों अलग-अलग करियर के लिए बने हैं। तो दोनों ही क्वालिफिकेशन के बारेमे कुछ खास चीजें समझना आपके लिए बेहद जरूरी है।

१) ACCA और CFA में कौनसा ज़्यादा मुश्किल है?

वैसे तो दोनों ही कठिन हैं लेकिन दोनों बिल्कुल अलग-अलग चीज़ें परखते हैं। तो पहले ACCA से शुरू करते है...

ACCA उन लोगों के लिए बना है जो अकाउंटिंग, ऑडिटिंग, टैक्सेशन और फाइनेंशियल रिपोर्टिंग में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। इसमें कुल १३ पेपर होते हैं और यह दुनिया की सबसे बेहतरीन अकाउंटिंग क्वालिफिकेशन में से एक मानी जाती है।

और अगर CFA की बात करें तो CFA का तरीका बिल्कुल अलग है। यह उन लोगों के लिए है जो इन्वेस्टमेंट, पोर्टफोलियो मैनेजमेंट और फाइनेंशियल मार्केट्स में काम करना चाहते हैं।

इसमें सिर्फ ३ लेवल हैं लेकिन हर लेवल इतना गहरा है कि CFA इंस्टीट्यूट खुद कहता है कि हर लेवल के लिए ३०० घंटे से ज़्यादा पढ़ाई करना जरूरी है।

अगर पास रेट की बात करें तो ACCA में हर परीक्षा (पेपर) में करीब ४० से ५५ प्रतिशत लोग पास होते हैं। CFA में यह आँकड़ा और कम है। लेवल१ में ३५ से ४० प्रतिशत, लेवल २ में ४० से ४५ प्रतिशत और लेवल ३ में ४५ से ५० प्रतिशत लोग पास होते है।

और दूसरी तरफ ACCA ज़्यादा विषयों को गहराई से सीखने में मदद करता है और इसीलिए यह समय भी ज़्यादा लेता है। CFA कम विषयों पर ध्यान केंद्रित करता है लेकिन हर चीज़ को बहुत गहराई से समझाता है।

२) ACCA और CFA के लिए एलिजिबिलिटी क्या है?

यह जानना बेहद ज़रूरी है कि इन दोनों क्वालिफिकेशन को शुरू करने के लिए आपको क्या चाहिए।

ACCA की बात करें तो इसमें एंट्री के लिए आपको १२वीं में कम से कम ६०% अंक होने चाहिए, तभी आप सीधे ACCA में दाखिला ले सकते हैं। और यह ध्यान रखें कि १२वीं के बाद ACCA में कोई छूट नहीं मिलती, सभी पेपर देने होंगे।
लेकिन अगर आपके १२वीं में ६०% से कम अंक हैं या आप १०वीं के बाद ही फाइनेंस की दुनिया में कदम रखना चाहते हैं तो भी रास्ता बंद नहीं है। इसके लिए FIA (Foundation in Accountancy) का रास्ता है। FIA आपको ACCA की तैयारी के लिए ज़रूरी बुनियाद देता है और इसे पूरा करने के बाद आप ACCA में आसानी से दाखिल हो सकते हैं।

CFA की बात अलग है। CFA लेवल १ में बैठने के लिए आपके पास बैचलर्स डिग्री होनी चाहिए या फिर आप अपने ग्रेजुएशन के आखिरी साल में होने चाहिए। यानी CFA शुरू करने के लिए कम से कम ग्रेजुएशन तक पहुंचना ज़रूरी है। इसके साथ क्वांटिटेटिव स्किल्स और एनालिटिकल सोच मज़बूत होनी चाहिए, सीधे शब्दों में कहें तो ACCA आपको जल्दी शुरुआत करने का मौका देता है, चाहे आप १०वीं के बाद FIA से आएं या १२वीं के बाद सीधे। CFA परीक्षा देने के लिए आपको ग्रेजुएशन के आखिरी साल तक इंतज़ार करना होगा।

३) ACCA या CFA: ज़्यादा कमाई किसमें है?

यह सवाल इतना आसान नहीं है क्योंकि दोनों अलग-अलग तरह की नौकरियों की तरफ ले जाते हैं।

ACCA करने वाले ज़्यादातर ऑडिट करने वाली कंपनियां, अकाउंटिंग डिपार्टमेंट, टैक्स कंसल्टिंग, फाइनेंशियल रिपोर्टिंग और कॉरपोरेट फाइनेंस में काम करते हैं। CFA करने वाले इन्वेस्टमेंट बैंक्स, एसेट मैनेजमेंट, इक्विटी रिसर्च, हेज फंड्स और फाइनेंशियल एडवाइजरी में जाते हैं।

भारत में अभी ACCA की सैलरी शुरुआत में सालाना ₹५ से १० लाख मिलती है, कुछ साल बाद उन्हें सालाना ₹१० से २५ लाख और सीनियर लेवल पर सालाना ₹२५ लाख से ऊपर मिल सकती है। और CFA में शुरुआत में सालाना ₹६ से १२ लाख मिलती है, कुछ साल बाद सालाना ₹१२ से ३० लाख और सीनियर लेवल पर सालाना ₹३० से ६० लाख से ऊपर मिलती है।

जो लोग इन्वेस्टमेंट और मार्केट्स से जुड़े पोजीशन में जाना चाहते हैं उनके लिए CFA में कमाई ज़्यादा होती है। और दूसरी तरफ ACCA करने वाले अकाउंटिंग, ऑडिट और कॉरपोरेट फाइनेंस में अच्छी कमाई करते है। दोनों क्वालिफिकेशन को १८० से ज़्यादा देशों में मान्यता हैं, यानी विदेश में भी काम करने का मौका मिल सकता है।

४) Big 4 कंपनियां किसे नौकरी देती हैं?

Deloitte, PwC, EY और KPMG ACCA और CFA दोनों को अलग-अलग टीम्स के लिए चुनाव करती हैं।

ACCA वाले खासतौर पर ऑडिट और एश्योरेंस टीम्स, टैक्स कंसल्टिंग और फाइनेंशियल रिपोर्टिंग से जुड़े जगहों में काम करते हैं। इसीलिए Big4 कंपनियों में ACCA मेंबर्स को दुनिया में सबसे ज़्यादा नौकरी मिलती है।

CFA वालों की ज़रूरत ज़्यादातर डील और ट्रांजैक्शन एडवाइजरी टीम्स में होती है जैसे वैल्युएशन, मर्जर एंड एक्विजिशंस और फाइनेंशियल कंसल्टिंग।

भारत में एक ज़रूरी बात यह है कि स्टेच्युटरी ऑडिट पर हस्ताक्षर करने का अधिकार सिर्फ ICAI के पास है। इसका मतलब यह है कि ACCA और CFA वाले भारत में अपने दम पर स्टेच्युटरी ऑडिट रिपोर्ट पर हस्ताक्षर नहीं कर सकते है। यह करने के लिए CA की डिग्री ज़रूरी है। लेकिन ACCA और CFA दोनों Big 4 कंपनियों में इंटरनल ऑडिट, अकाउंटिंग एडवाइजरी और दूसरे सपोर्ट रोल्स में काम कर सकते हैं।

५) ACCA के बाद CFA करना चाहिए?

बहुत सारे फाइनेंस प्रोफेशनल्स दोनों करते हैं और इसके पीछे एक ठोस वजह है।

ACCA आपको अकाउंटिंग, टैक्सेशन और फाइनेंशियल रिपोर्टिंग की मज़बूत नींव देता है। यह सिखाता है कि कोई भी बिजनेस अपना पैसा कैसे रिकॉर्ड करता है, कैसे मैनेज करता है और कैसे दुनिया के सामने रखता है।

और CFA उस नींव के ऊपर एक बिल्कुल नई दुनिया बनाता है। इन्वेस्टमेंट, फाइनेंशियल मार्केट्स और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट की गहरी समझ देता है। यह वो नज़रिया है जो ACCA में नहीं मिलता।

दुनिया भर के एंप्लॉयर्स की नज़र में ACCA और CFA की यह कॉम्बिनेशन बहुत ही मूल्यवान होता जा रहा है। यह कॉम्बिनेशन दिखाता है कि आप फाइनेंस के दोनों पहलू समझते हैं जैसे अकाउंटिंग और इन्वेस्टमेंट दोनों। यह कॉम्बिनेशन खासतौर पर उनके लिए फायदेमंद है जो इन्वेस्टमेंट बैंकिंग, प्राइवेट इक्विटी, वैल्युएशन या फाइनेंशियल कंसल्टिंग में जाना चाहते हैं।

६) कौन सा ज़्यादा वक्त लेता है?

ACCA में १३ परीक्षा (पेपर) देने होते हैं और आमतौर पर २.५ से ३.५ साल लग जाते हैं। पूरी मेंबरशिप मिलने के लिए परीक्षा के साथ-साथ ३६ महीने का काम का असली अनुभव भी ज़रूरी है।

और CFA में ३ लेवल होते हैं और आमतौर पर २ से ४ साल लगते हैं। CFA चार्टर मिलने से पहले ४ साल का काम का अनुभव भी होना चाहिए।

देखने में CFA में पेपर्स बहुत कम हैं लेकिन हर लेवल की तैयारी इतनी गहरी होती है कि कुल मिलाकर वक्त लगभग ACCA के बराबर ही लगता है। दोनों के लिए सिर्फ परीक्षा पास करना काफी नहीं है। असली काम का अनुभव भी उतना ही ज़रूरी है।

आखिरी बात

ACCA और CFA दोनों बेहतरीन क्वालिफिकेशन हैं लेकिन दोनों अलग-अलग करियर के लिए हैं।

अगर आप अकाउंटिंग, ऑडिट, टैक्स या कॉरपोरेट फाइनेंस में आगे बढ़ना चाहते हैं तो ACCA आपके लिए सबसे सही रास्ता है। अगर आपका दिल इन्वेस्टमेंट, पोर्टफोलियो मैनेजमेंट या फाइनेंशियल मार्केट्स में लगता है तो CFA आपकी मंज़िल है।

और अगर आप दुनिया के इस प्रतिस्पर्धी फाइनेंस मार्केट में सबसे आगे निकलना चाहते हैं तो ACCA के बाद CFA वो कॉम्बिनेशन है जो आपको भीड़ से अलग खड़ा कर सकता है।

अगर आप फाइनेंस में करियर के बारे में सोच रहे हैं तो Zell Education में हम आपको पूरा करियर बनाने में मदद करते हैं। हम ACCA और CFA के साथ-साथ US CMA, CPA और FRM की भी तैयारी करवाते हैं, यानी फाइनेंस का कोई भी रास्ता हो, Zell आपके साथ है।

और अगर आप CFA की तैयारी Zell के साथ करते हैं तो आपको सिर्फ CFA की पढ़ाई नहीं मिलती। लेवल १ की पढ़ाई के दौरान आप ८ अलग-अलग सर्टिफिकेशन भी हासिल कर सकते हैं जो आपकी हायरिंग प्रोफाइल को बाकी लोगों से एकदम अलग और मज़बूत बनाती हैं। 

और अगर आप US CMA में रुचि रखते हैं तो यह वक्त बिल्कुल सही है। अगर आप २७ मार्च २०२६ से पहले रजिस्टर करते हैं तो आपको एग्जाम फीस में ६०% की छूट मिलती है। और ३० जून २०२६ तक रजिस्टर करने पर १५% की छूट मिलती है। यह ऑफर सीमित समय के लिए है तो देर न करें।

उम्मीद करते है यह जानकारी आपके लिए मददगार साबित हुआ है। धन्यवाद