राजकोट : राजकोट टीबी मुक्त बनने की ओर अग्रसर, 100 दिन का गहन अभियान शुरू

355 ग्राम पंचायतें ‘टीबी मुक्त’ घोषित, 1.19 लाख लोगों की जांच; निक्षय मित्रों और जनभागीदारी से तेज हुई मुहिम

राजकोट : राजकोट टीबी मुक्त बनने की ओर अग्रसर, 100 दिन का गहन अभियान शुरू

गुजरात का राजकोट जिला ‘टीबी मुक्त भारत’ के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विश्व टीबी दिवस (24 मार्च) के अवसर पर जिले में 100 दिन का गहन टीबी उन्मूलन अभियान शुरू किया गया, जिसमें जनभागीदारी और स्वास्थ्य तंत्र के समन्वय से बीमारी को जड़ से खत्म करने पर जोर दिया जा रहा है।

जिले की उल्लेखनीय उपलब्धि यह रही कि कुल 595 ग्राम पंचायतों में से 355 को वर्ष 2025 के लिए ‘टीबी मुक्त ग्राम पंचायत’ घोषित किया गया। पडधरी में आयोजित ‘सरपंच संवाद’ कार्यक्रम में जिला कलेक्टर डॉ. ओम प्रकाश, जिला विकास अधिकारी आनंदू सुरेश गोविंद तथा पुलिस अधीक्षक विजयसिंह गुर्जर ने सरपंचों को गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल व प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया।

जागरूकता बढ़ाने के लिए जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. घनश्याम मेहता के मार्गदर्शन में स्कूलों और कॉलेजों में विशेष अभियान चलाया गया। 64 रैलियों में 5,909 विद्यार्थियों ने भाग लिया, जबकि 242 स्कूलों में 38,964 छात्रों को टीबी के प्रति स्वास्थ्य शिक्षा दी गई।

स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता के तहत जिले में 529 स्क्रीनिंग कैंप आयोजित किए गए, जिनमें 1,19,251 लोगों की जांच की गई। इनमें 736 संदिग्ध मरीज पाए गए, जिनमें से 5 में टीबी की पुष्टि हुई और उनका तत्काल इलाज शुरू कर दिया गया।

इस अभियान में समाज की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। 213 नए ‘निक्षय मित्र’ जुड़े, जिन्होंने 272 मरीजों को न्यूट्रिशन किट वितरित की। वहीं 241 जनभागीदारी कार्यक्रमों में 12,013 लोगों ने हिस्सा लेकर टीबी उन्मूलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. जे. पी. नड्डा द्वारा देशव्यापी अभियान की शुरुआत के बाद राजकोट में भी 100 दिन की विशेष योजना लागू की गई है। इसके तहत 60 वर्ष से अधिक आयु के लोग, डायबिटीज, कैंसर और एड्स से पीड़ित मरीज, ईंट भट्टों में कार्यरत श्रमिक तथा कम बीएमआई वाले व्यक्तियों को ‘हाई रिस्क’ श्रेणी में रखकर विशेष जांच की जाएगी।

जिले के 142 गांवों में 14 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों की एक्स-रे जांच की जाएगी और आधुनिक TRUNAAT व CBNAAT मशीनों के माध्यम से सटीक निदान व मुफ्त उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।

जिला प्रशासन ने नागरिकों से इस सेवा मिशन में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए अधिक से अधिक लोगों को ‘निक्षय मित्र’ बनने और टीबी मरीजों को गोद लेकर पोषण किट उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। अधिकारियों का कहना है कि सामूहिक प्रयासों से ही यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है—“हाँ, हम टीबी को खत्म कर सकते हैं।”

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