सूरत : सोलर इंडस्ट्री को राहत दिलाने की कवायद, चैंबर ऑफ कॉमर्स के डेलिगेशन ने दिल्ली में दी प्रजेंटेशन
ALMM-II नियमों को एक साल टालने की मांग; रिन्यूएबल एनर्जी मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने दिया सकारात्मक विचार का भरोसा
सूरत। भारत के सौर ऊर्जा क्षेत्र को तकनीकी और आर्थिक चुनौतियों से बचाने के लिए सदर्न गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने केंद्र सरकार के समक्ष एक महत्वपूर्ण पक्ष रखा है।
चैंबर के अध्यक्ष निखिल मद्रासी के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय डेलिगेशन ने 2 मार्च को नई दिल्ली में 'मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी' (MNRE) के सचिव संतोष कुमार सारंगी से मुलाकात कर विस्तृत प्रजेंटेशन दिया।
चैंबर डेलिगेशन ने मंत्रालय से ALMM-II (Approved List of Models and Manufacturers) के तहत स्वीकृत सोलर सेल के अनिवार्य इस्तेमाल की समय सीमा को 1 जून, 2026 से बढ़ाकर 1 जून, 2027 करने का आग्रह किया है। डेलिगेशन में पूर्व अध्यक्ष बी.एस. अग्रवाल और सचिव पॉलिक देसाई भी शामिल थे।
चैंबर ने सचिव के समक्ष सोलर मार्केट की जमीनी हकीकत रखते हुए निम्नलिखित बिंदु उठाए।
डिमांड-सप्लाई में बड़ा अंतर: वर्तमान में भारत में आधुनिक TOPCon सोलर सेल की उत्पादन क्षमता केवल 12 GW है, जबकि बाजार में इसकी मांग कहीं अधिक है। दूसरी ओर, पुराने 'Mono PERC' सेल का उत्पादन अधिक है लेकिन मांग कम, जिससे असंतुलन पैदा हो गया है।
लागत में भारी बढ़ोतरी: घरेलू और आयातित (Imported) TOPCon सेल की कीमत में करीब 9 रुपये प्रति वॉट का अंतर है। इससे प्रति मेगावाट सौर परियोजना की लागत 90 लाख रुपये तक बढ़ सकती है, जिससे प्रोजेक्ट्स आर्थिक रूप से बोझिल हो जाएंगे।
क्वालिटी और एफिशिएंसी: डेलिगेशन ने बताया कि घरेलू स्तर पर निर्मित सेल अभी विकास के चरण (Development Stage) में हैं। अंतरराष्ट्रीय मानकों की तुलना में इनकी गुणवत्ता और कार्यक्षमता कम होने से सौर परियोजनाओं की सफलता पर असर पड़ सकता है।
चैंबर ने मंत्रालय को सचेत किया कि यदि यह नियम समय से पहले लागू किया गया, तो परियोजनाओं की बढ़ती लागत देश में सौर ऊर्जा के विस्तार की रफ्तार को धीमा कर सकती है। यह स्थिति भारत सरकार के 2030 तक 500 GW रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता हासिल करने के महात्वाकांक्षी लक्ष्य के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।
सचिव संतोष कुमार सारंगी ने चैंबर की दलीलों को गंभीरता से सुना। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इंडस्ट्री के हितों और देश के ऊर्जा लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय स्तर पर इन सुझावों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।
