टैरिफ को रद्द करने के फैसले से बौखलाए ट्रंप, दुनिया पर फोड़ा टैरिफ बम
वकील कत्याल ने कहा- ट्रंप मनमानी नहीं कर सकते हैं कांग्रेस के पास जाएं
वाशिंगटन, 22 फरवरी (वेब वार्ता)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट से मिली हार के बाद एक बार फिर से टैरिफ बम फोड़ दिया है।
यूएस सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा दुनिया के तमाम देशों पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को गैरकानूनी बताकर इसे रद्द करने का फैसला सुनाया था, तो इसके तुरंत बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने सभी देशों पर 10 फीसदी का ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। इसके महज 24 घंटे के अंदर ही उन्होंने फिर से टैरिफ बम फोड़ा और इसे बढ़ाकर 15फीसदी कर दिया है।
अमेरिका के इस कदम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में ट्रंप को झटका देने वाले भारतीय-अमेरिकी वकील नील कत्याल ने सवाल उठाए हैं।
बता दें ट्रंप ने ग्लोबल टैरिफ को बढ़ा दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट के जरिए ऐलान किया कि यूएस तत्काल प्रभाव से दुनिया भर के देशों पर लागू 10 फीसदी टैरिफ को बढ़ाते हुए 15फीसदी करने जा रहा है।
इस टैरिफ हाइक के साथ ही उन्होंने फिर से पुराना दावा दोहराते हुए कहा है कि तमाम देश दशकों से अमेरिका का फायदा उठाते आ रहे हैं और टैरिफ से जुड़ा ये फैसला उसी का जवाब है। उन्होंने ये भी कहा कि टैरिफ हाइक पूरी तरह से कानून के दायरे में है और इसकी जांच-परख भी की जा चुकी है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में नील कत्याल ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के लिए धारा 122 पर भरोसा करते हुए इसका सहारा लेना मुश्किल नजर आता है, क्योंकि इसी मामले में अमेरिकी न्याय विभाग ने सुप्रीम कोर्ट को इसके विपरीत बताया था।
उन्होंने कहा कि धारा 122 का यहां कोई स्पष्ट अनुप्रयोग नहीं है, क्योंकि ट्रंप ने जिस आपातकालीन स्थिति का हवाला दिया था, वह व्यापार घाटे से जुड़ी है, कत्याल ने आगे कहा कि अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बड़े स्तर पर दुनिया के देशों के ऊपर टैरिफ लगाना ही चाहते हैं, तो उन्हें इसके लिए अमेरिकी तरीका अपनाना चाहिए और कांग्रेस के पास जाना चाहिए।
बता दें कत्याल वह भारतीय-अमेरिकी वकील हैं, जिनकी अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में दलीलों ने ट्रंप टैरिफ को चारों खाने चित कर दिया था। उन्होंने कोर्ट में कहा था कि अमेरिकी संसद कांग्रेस के पास व्यापार को विनियमित करने की शक्ति है, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप इस शक्ति को मनमाने ढंग से इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं।
