सूरत : आत्मनिर्भर गांवों से ही 12% GDP ग्रोथ संभव: IITian विप्रा गोयल

अगर कोई किसान अपनी ज़मीन के 5% हिस्से पर तालाब बना ले, तो वह पूरे साल अपने खेतों की सिंचाई कर सकता है

सूरत : आत्मनिर्भर गांवों से ही 12% GDP ग्रोथ संभव: IITian विप्रा गोयल

सूरत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत @2047’ विजन को साकार करने के लिए देश को 12% की वार्षिक GDP ग्रोथ दर से आगे बढ़ना होगा। यह लक्ष्य तभी संभव है जब ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाया जाए और राष्ट्रीय परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए।

यह बात IIT खड़गपुर से शिक्षित और भारत सरकार की पूर्व सलाहकार विप्रा गोयल ने सूरत सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही।
विप्रा गोयल ने कहा कि ‘विकसित भारत’ का मार्ग ‘आत्मनिर्भर गांवों’ से होकर गुजरता है।

यदि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और अटल भूजल योजना जैसी योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू हों, तो देश के 10 करोड़ किसान परिवारों की औसत वार्षिक आय 24,000 रुपये से बढ़कर 1.5 से 2 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। इससे बाजार में कपड़े, बर्तन, खाद्य सामग्री और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की मांग बढ़ेगी, जिसका सीधा लाभ 9 करोड़ लघु उद्योगों को मिलेगा।

उन्होंने चेतावनी दी कि लगातार भूजल दोहन के कारण जलस्तर खतरनाक रूप से नीचे जा रहा है। यदि इसे नहीं रोका गया तो खेती की जमीन बंजर हो सकती है। समाधान बताते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसान अपनी जमीन के 5% हिस्से में खेत तलावड़ी (फार्म पॉन्ड) बनाएं तो पूरे वर्ष सिंचाई संभव है। वहीं 1% जमीन पर सोलर पैनल लगाकर सालभर की बिजली आवश्यकता पूरी की जा सकती है।

विप्रा गोयल ने प्रधानमंत्री कुसुम, प्रधानमंत्री किसान संपदा जैसी योजनाओं सहित विभिन्न ग्रामीण योजनाओं के प्रति 80 करोड़ ग्रामीणों में जागरूकता फैलाने के लिए राष्ट्रीय अभियान शुरू करने की जानकारी दी।

सूरत की भूमिका पर उन्होंने कहा कि सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री की लगभग 60% मांग ग्रामीण क्षेत्रों से आती है। यदि गांवों की आय बढ़ती है तो सूरत सहित देश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

विप्रा गोयल ने वर्ष 2022 में दौसा जिले के छेरड़ा गांव को गोद लेकर जल-ऊर्जा-रोजगार मॉडल लागू किया। यहां पहले जलस्तर 500–700 फीट नीचे था। लगभग 8 करोड़ रुपये की लागत से 300 खेत तालाब बनाए गए, जिससे किसानों की आय में सामूहिक रूप से 900 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई और गांव में 100% रोजगार सुनिश्चित हुआ। सिंचाई की बेहतर व्यवस्था से शहरों की ओर पलायन भी रुका है।

विप्रा गोयल ने कहा कि पानी, ऊर्जा, रोजगार और बाजार आत्मनिर्भरता पर आधारित यह मॉडल देशभर में लागू किया जाए तो भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ सकता है।

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