सूरत : टीचर की आख़िरी सीख—मृत्यु के बाद भी जीवनदान
करंज की प्रिंसिपल जागृतिबेन पटेल के परिवार ने हाथ और आंखें दान कर तीन लोगों को दी नई ज़िंदगी
सूरत। सूरत की एक शिक्षिका ने मृत्यु के बाद भी मानवता को जीने का संदेश दिया। करंज प्राइमरी स्कूल की प्रिंसिपल 48 वर्षीय जागृतिबेन दिलीपभाई पटेल के ब्रेन डेड घोषित होने के बाद उनके परिवार ने डोनेट लाइफ संस्था के माध्यम से उनका दाहिना हाथ और आंखें दान कर तीन ज़रूरतमंदों को नई ज़िंदगी और नई रोशनी दी।
डोनेट लाईफ के संस्थापक निलेश मांडलेवाला ने जानकारी देते हुए कहा कि अंगदान सूरत के महावीर हॉस्पिटल में किया गया। दाहिना हाथ समय पर चेन्नई पहुंचाने के लिए सूरत सिटी पुलिस ने महावीर हॉस्पिटल से सूरत एयरपोर्ट तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया, ताकि ट्रांसप्लांट प्रक्रिया में कोई देरी न हो।
जागृतिबेन 5 फरवरी की रात करंज गांव में मेलडी मां मंदिर की सालगिरह के अवसर पर आयोजित भजन कार्यक्रम में गई थीं। इसी दौरान उनका ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ गया और वे बेहोश हो गईं। परिजनों ने तुरंत 108 एम्बुलेंस के ज़रिए उन्हें महावीर हॉस्पिटल में भर्ती कराया, जहां CT स्कैन में ब्रेन हेमरेज की पुष्टि हुई।
6 फरवरी को न्यूरोफिज़ीशियन डॉ. भौतिक पटेल, इंटेंसिविस्ट डॉ. श्रेया माहेश्वरी, मेडिकल एडमिनिस्ट्रेटर डॉ. निमिश पारिख और RMO डॉ. पूजा पटेल ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया।
ब्रेन डेथ की जानकारी मिलने के बाद परिवार और चैंबर मेंबर अंकुर पटेल ने डोनेट लाइफ संस्था के CEO और ट्रस्टी नीरव मंडलेवाला से संपर्क किया। डोनेट लाइफ की टीम ने अस्पताल पहुंचकर जागृतिबेन के पति दिलीपभाई, बेटियों हनी और ध्वनि, बेटे प्रिंस, पिता शांतुभाई और अन्य परिजनों को अंगदान की प्रक्रिया और महत्व समझाया।
परिवार ने गुरुहरि प्रबोध स्वामीजी और गुरुप्रसाद स्वामी से मार्गदर्शन लिया, जिन्होंने अंगदान को मानवता की सेवा बताते हुए आशीर्वाद दिया। इसके बाद परिवार ने अंगदान की सहमति दी।
मेडिकल कारणों से किडनी, लिवर, हार्ट और फेफड़ों का दान संभव नहीं हो सका। गुजरात में हाथ के लिए उपयुक्त मरीज़ न होने पर NOTTO के माध्यम से दाहिना हाथ ग्लेनीगल्स हेल्थसिटी हॉस्पिटल, चेन्नई को आवंटित किया गया।
चेन्नई के डॉक्टर अरविंद महाराज और उनकी टीम सूरत पहुंची और हाथ को लेकर गई। बाद में 17 वर्षीय तमिलनाडु के एक किशोर में सफल ट्रांसप्लांट किया गया। आंखों का दान लोक दृष्टि आई बैंक द्वारा लिया गया।
टेक्सटाइल और डायमंड सिटी के रूप में पहचाना जाने वाला सूरत अब देश में ऑर्गन डोनर सिटी के रूप में भी पहचान बना रहा है। सूरत सिटी पुलिस अब तक 141 ग्रीन कॉरिडोर बनाकर दिल, फेफड़े, हाथ, लिवर, किडनी और अन्य अंगों को समय पर देश के विभिन्न शहरों तक पहुंचा चुकी है।
डोनेट लाइफ संस्था अब तक 1371 अंग और टिश्यू डोनेट करवा चुकी है, जिनमें 551 किडनी, 240 लिवर, 57 दिल, 56 फेफड़े, 11 हाथ और 446 आंखें शामिल हैं। इन दानों से देश-विदेश में 1263 लोगों को नई ज़िंदगी और नई नज़र मिली है।
डोनेट लाइफ संस्था स्वर्गीय जागृतिबेन दिलीपभाई पटेल के परिवार को इस महान मानवीय निर्णय के लिए श्रद्धांजलि अर्पित करती है।
