व्यापार समझौते में संवेदनशील अनाज, फल, डेयरी उत्पाद और मांस पर कोई शुल्क रियायत नहीं

व्यापार समझौते में संवेदनशील अनाज, फल, डेयरी उत्पाद और मांस पर कोई शुल्क रियायत नहीं

नई दिल्ली, 07 फरवरी (वेब वार्ता)। भारत ने अंतरिम व्यापार समझौते के तहत मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पॉल्ट्री, दूध, पनीर, एथनॉल (ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियों और मांस जैसे संवेदनशील कृषि एवं डेयरी उत्पादों के मामले में अमेरिका को कोई शुल्क रियायत नहीं दी है और इन क्षेत्रों को पूरी तरह संरक्षण दिया गया है।

भारत और अमेरिका ने शनिवार को अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा पर सहमत होने की घोषणा की। इस समझौते के तहत अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर शुल्क को पहले के 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा।

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘यह समझौता किसानों के हितों की रक्षा करने और ग्रामीण आजीविका को बनाए रखने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इसके तहत मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पॉल्ट्री, दूध, पनीर, एथनॉल(ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियां और मांस सहित संवेदनशील कृषि एवं डेयरी उत्पादों को पूरी तरह से संरक्षित किया गया है।’

इन वस्तुओं का संबंध भारत के छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका से जुड़ा होने के कारण इन्हें संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। उन्होंने कहा कि सभी व्यापार वार्ताओं में किसानों के हित सर्वोपरि रहते हैं और मोदी सरकार किसानों की रक्षा करने और ग्रामीण आजीविका को सुरक्षित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

गोयल ने कहा, ‘‘भारत-अमेरिका अंतरिम समझौते की रूपरेखा के माध्यम से भारतीय वस्तुओं के लिए तरजीही पहुंच सुनिश्चित करते हुए, अनाज, फल, सब्जी, मसाले, तिलहन, डेयरी, मुर्गी पालन और मांस सहित कई अन्य संवेदनशील कृषि क्षेत्र को लेकर कोई रियायत नहीं दी गई है।’’

भारत ने अन्य मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) में भी संवेदनशील कृषि और डेयरी उत्पादों पर किसी तरह की आयात शुल्क रियायत नहीं दी है। हाल ही में यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के साथ मुक्त व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दिया गया है।

ऐसे व्यापार समझौतों के तहत, कुछ क्षेत्रों में आयात शुल्क को समझौता लागू होने के दिन ही समाप्त कर दिया जाता है, जबकि अन्य क्षेत्रों में इसे धीरे-धीरे कम किया जाता है। कुछ क्षेत्रों में शुल्क घटाया जाता है, जबकि अन्य क्षेत्रों में कोटा आधारित रियायतें प्रदान की जाती हैं।

भारत ने हमेशा से ही डेयरी, चावल, गेहूं, मांस, पॉल्ट्री, अनाज, आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य पदार्थ, सोयामील और मक्का जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को अपने व्यापार समझौतों के दायरे से बाहर रखा है।

कृषि और पशुपालन जैसी संबद्ध गतिविधियां भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, जो 70 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करती हैं। विकसित अर्थव्यवस्थाओं के विपरीत, जहां कृषि अत्यधिक मशीनीकृत और कॉरपोरेट क्षेत्र के रूप में है, भारत में यह एक बड़ी आबादी की आजीविका का साधन है।

भारत के कृषि क्षेत्र को वर्तमान में मध्यम से उच्च आयात शुल्क और नियमों के जरिये संरक्षण दिया गया है, जो करोड़ों घरेलू किसानों को अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचाते हैं।

अमेरिका से भारत को कृषि निर्यात वर्ष 2024 में 1.6 अरब डॉलर था। इन प्रमुख निर्यातों में बादाम (छिलके सहित, 86.8 करोड़ डॉलर), पिस्ता (12.1 करोड़ डॉलर), सेब (2.1 करोड़ डॉलर), एथनॉल (एथिल अल्कोहल, 26.6 करोड़ डॉलर) शामिल हैं।

भारत की 50 प्रतिशत से अधिक आबादी के आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर होने से भारत इस पूरे क्षेत्र को संवेदनशील मानता है। आयात या सीमा शुल्क विशेष रूप से मुख्य फसलों, दुग्ध उत्पादों और प्रमुख कृषि उत्पादों के लिए महत्वपूर्ण हैं जो ग्रामीण आजीविका को बनाए रखते हैं।

भारत का लक्ष्य अगले चार साल में कृषि, समुद्री उत्पाद और खाद्य एवं पेय पदार्थों के संयुक्त निर्यात को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना है। मुख्य निर्यात वस्तुओं में चाय, कॉफी, चावल, कुछ अनाज, मसाले, काजू, तेल खली, तिलहन, फल ​​और सब्जियां शामिल हैं।

दोनों देशों के संयुक्त बयान के मुताबिक, भारत अमेरिका के कई खाद्य एवं कृषि उत्पादों पर शुल्क समाप्त करेगा या कम कर देगा। इनमें सूखे अनाज, पशु आहार के लिए लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, शराब एवं स्पिरिट तथा अन्य उत्पाद शामिल हैं।