अमेरिका से व्यापार समझौते पर बनी सहमति के बाद आरबीआई ने रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर कायम रखा

अमेरिका से व्यापार समझौते पर बनी सहमति के बाद आरबीआई ने रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर कायम रखा

मुंबई, 06 फरवरी (वेब वार्ता)। भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को उम्मीद के मुताबिक नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा।

महंगाई में नरमी, वृद्धि को लेकर चिंता दूर होने के साथ बजट में सरकारी खर्च में वृद्धि तथा अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर बनी सहमति के बाद शुल्क को लेकर दबाव कम होने के बीच नीतिगत दर को यथावत रखने की उम्मीद की जा रही थी।

केंद्रीय बैंक की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने आम सहमति से रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर कायम रखने का निर्णय लिया। इसके साथ आरबीआई ने अपने तटस्थ रुख को बरकरार रखा, जिसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक स्थिति के हिसाब से नीतिगत दर में समायोजन को लेकर लचीला बना रहेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सप्ताह की शुरुआत में भारतीय वस्तुओं पर शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की है। इससे भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव कम हुआ है।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने एमपीसी के फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि बाहरी चुनौतियां बढ़ गई हैं, लेकिन अमेरिका के साथ व्यापार समझौते का सफल समापन अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत है।

आरबीआई ने फरवरी, 2025 से रेपो दर में अब तक कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की है। यह 2019 के बाद से सबसे आक्रामक कटौती है। दिसंबर में हुई पिछली बैठक में आरबीआई ने प्रमुख ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती की थी।

उन्होंने कहा, ‘‘बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ती अनिश्चितता के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत वृद्धि और कम मुद्रास्फीति के साथ अच्छी स्थिति में है। मुद्रास्फीति संतोषजनक सीमा से नीचे बनी हुई है और इसका परिदृश्य अनुकूल बना हुआ है।”

मल्होत्रा ने कहा, ‘‘यूरोपीय संघ के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर बनी सहमति से वृद्धि की गति लंबे समय तक बनी रहने की उम्मीद है।’’

चालू वित्त वर्ष में मुद्रास्फीति औसतन 2.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो केंद्रीय बैंक के चार प्रतिशत के लक्ष्य से कम है। मार्च में समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

आरबीआई ने आगामी वित्त वर्ष की पहली दो तिमाहियों के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि अनुमान को बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत (अप्रैल-जून) और 7.0 प्रतिशत (जुलाई-सितंबर) कर दिया है। हालांकि पूरे वर्ष के अनुमान को अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दिया है क्योंकि नई जीडीपी श्रृंखला इसी महीने जारी की जाएगी।