सूरत : बजट में सीधी सब्सिडी नहीं, पर सूरत के वीवर्स को मिली काम की राहत : गिरधर गोपाल मूंदड़ा
सस्ता लोन, टेक्नोलॉजी अपग्रेड और ग्रीन टेक्सटाइल पर फोकस से दीर्घकालीन ग्रोथ की उम्मीद
केंद्र सरकार के हालिया बजट में भले ही सूरत के वीवर्स और टेक्सटाइल उद्योग को सीधी सब्सिडी की घोषणा न की गई हो, लेकिन MSME सेक्टर को ध्यान में रखते हुए कई ऐसे प्रावधान किए गए हैं, जो उद्योग के लिए राहत और भविष्य की स्थायी वृद्धि का आधार बन सकते हैं।
जाने माने कपड़ा कारोबारी गिरधर गोपाल मूंदड़ा ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बजट में MSME इकाइयों के लिए सस्ता और आसान ऋण उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है, जिससे वर्किंग कैपिटल से जुड़ी समस्याएं कुछ हद तक कम होने की उम्मीद है। इससे छोटे और मध्यम स्तर के वीवर्स को रोजमर्रा के संचालन में सहूलियत मिलेगी। मशीनरी और टेक्नोलॉजी अपग्रेड के मोर्चे पर भी सरकार का फोकस साफ नजर आता है। पुराने पावरलूम को बदलने या आधुनिक तकनीक से अपग्रेड करने को प्रोत्साहन मिलने से न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि फैब्रिक की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
उन्होंने कहा कि बजट में MMF (मैन-मेड फाइबर) और गारमेंट सेक्टर को बढ़ावा देने के संकेत भी दिए गए हैं। पॉलिएस्टर और अन्य सिंथेटिक फैब्रिक की मांग बढ़ने की संभावना है। यदि गारमेंट ऑर्डर में तेजी आती है, तो इसका सीधा फायदा सूरत के वीवर्स को मिलेगा। इसके साथ ही ग्रीन टेक्सटाइल की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं। बिजली बचत, सोलर एनर्जी के उपयोग और कम वेस्ट वाली यूनिट्स को भविष्य में अधिक लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। इससे इको-फ्रेंडली फैब्रिक की मांग भी बढ़ सकती है।
स्किल डेवलपमेंट के तहत ‘समर्थ 2.0’ योजना में कारीगरों की ट्रेनिंग पर जोर दिया गया है। इससे कम वेस्ट में ज्यादा आउटपुट हासिल करने में मदद मिलेगी और उत्पादन प्रक्रिया अधिक कुशल बनेगी। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट तुरंत कोई बड़ा चमत्कार भले न करे, लेकिन ऑर्डर, एक्सपोर्ट और टेक्नोलॉजी के जरिए सूरत के वीवर्स के लिए स्थायी विकास का रास्ता जरूर खोलता है।
