सूरत : विझिंजम पोर्ट का मेगा विस्तार: ₹16,000 करोड़ के निवेश के साथ फेज-2 शुरू

केरल में अदाणी का कुल निवेश ₹30,000 करोड़ पहुंचा, 2028 तक अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट हब बनेगा विझिंजम; अफ्रीका और मध्य-पूर्व के बंदरगाहों को भी देगा सेवा

सूरत : विझिंजम पोर्ट का मेगा विस्तार: ₹16,000 करोड़ के निवेश के साथ फेज-2 शुरू

सूरत। भारत की सबसे बड़ी लॉजिस्टिक्स कंपनी अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (APSEZ) ने केरल के विझिंजम इंटरनेशनल सीपोर्ट के विस्तार के लिए ₹16,000 करोड़ के निवेश की औपचारिक घोषणा की है। यह निवेश 'इन्वेस्ट केरल ग्लोबल समिट 2025' में घोषित ₹30,000 करोड़ के कुल निजी निवेश का हिस्सा है, जो केरल के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश है।

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इस अवसर पर कहा, "विझिंजम अब केवल एक नेशनल ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल नहीं रहा, बल्कि पूर्ण विकास के बाद यह अफ्रीका और मध्य-पूर्व की सेवा करने वाला एक 'अंतरराष्ट्रीय हब' बन जाएगा। यह वैश्विक समुद्री व्यापार के मानचित्र पर भारत का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरेगा।"

अदाणी ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर करण अदाणी ने पोर्ट के शानदार प्रदर्शन के आंकड़े साझा किए। सबसे तेज़ 10 लाख TEU: विझिंजम भारत का सबसे तेज़ पोर्ट बना जिसने रिकॉर्ड समय में 10 लाख TEU (स्टैंडर्ड कंटेनर) का आंकड़ा पार किया।

विशाल जहाज़ों की पसंद: पिछले एक साल में 399 मीटर से अधिक लंबे 50 से ज्यादा अल्ट्रा लार्ज कंटेनर वेसल्स (ULCV) यहाँ पहुंचे। दुनिया का सबसे बड़ा जहाज़ 'MSC इरिना' भी यहाँ सफलतापूर्वक हैंडल किया गया। मासिक रिकॉर्ड: दिसंबर 2025 में 1.21 लाख TEU हैंडल कर इसने दक्षिण और पूर्वी तट का नया रिकॉर्ड बनाया।

फेज-2: क्षमता में 5 गुना से ज्यादा बढ़ोतरी
मास्टरप्लान के अनुसार, फेज-2 का लक्ष्य 2028 तक विस्तार कार्य पूरा करना है। बर्थ की लंबाई: कंटेनर बर्थ को 800 मीटर से बढ़ाकर 2,000 मीटर किया जाएगा। ब्रेकवॉटर विस्तार: इसे लगभग 3,900 मीटर तक बढ़ाया जाएगा। क्षमता: 2029 तक पोर्ट की क्षमता 10 लाख TEU से बढ़कर 57 लाख TEU हो जाएगी।

टेक्नोलॉजी और सशक्तिकरण में अग्रणी
विझिंजम न केवल व्यापार बल्कि तकनीक में भी मिसाल है। सेमी-ऑटोमेटेड पोर्ट: यह भारत का पहला सेमी-ऑटोमेटेड कंटेनर पोर्ट है। महिला क्रेन ऑपरेटर्स: देश का पहला पोर्ट जहाँ महिला ऑपरेटर्स ऑटोमेटेड क्रेन संभाल रही हैं। प्राकृतिक लाभ: 18-20 मीटर की प्राकृतिक गहराई के कारण यहाँ दुनिया के सबसे बड़े जहाज़ बिना अतिरिक्त ड्रेजिंग के आ सकते हैं।

कोलंबो और सिंगापुर का भारतीय विकल्प
अपनी रणनीतिक स्थिति (पूर्व-पश्चिम शिपिंग रूट के करीब) के कारण विझिंजम अब दुबई, कोलंबो और सिंगापुर जैसे ग्लोबल हब्स का एक सशक्त विकल्प बन गया है। इस विस्तार से न केवल केरल में बड़े पैमाने पर रोज़गार पैदा होगा, बल्कि भारत की लॉजिस्टिक्स लागत में भी कमी आएगी।