सूरत : बजट 2026-27, नायलॉन बुनकरों की वित्त मंत्री से गुहार—"इम्पोर्टेड यार्न पर न लगे MIP या एंटी-डंपिंग ड्यूटी"

वीवर्स लीडर्स ने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को भेजा ज्ञापन; कहा—"कॉर्पोरेट स्पिनरों के हित में लिया फैसला तो कबाड़ में बिक जाएंगी लाखों मशीनें"

सूरत : बजट 2026-27, नायलॉन बुनकरों की वित्त मंत्री से गुहार—

सूरत।आगामी 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले केंद्रीय बजट से पहले सूरत के टेक्सटाइल वीविंग सेक्टर ने केंद्र सरकार के सामने अपनी अस्तित्व की लड़ाई छेड़ दी है।

'नायलॉन वीवर्स एसोसिएशन सूरत', 'वेडरोड वीवर्स एसोसिएशन' और 'सचिन इंडस्ट्रियल सोसाइटी' के प्रमुखों ने एक संयुक्त पत्र लिखकर सरकार को चेतावनी दी है कि यदि चंद बड़े नायलॉन स्पिनरों के दबाव में आकर आयातित नायलॉन यार्न पर MIP (Minimum Import Price) या एंटी-डंपिंग ड्यूटी (ADD) लगाई गई, तो सूरत की वीविंग इंडस्ट्री पूरी तरह तबाह हो जाएगी।

मयूर गोलवाला (सचिव, सचिन इंडस्ट्रियल सोसाइटी), मयूर चेवली (अध्यक्ष, नायलॉन वीवर्स एसोसिएशन, सूरत), भूपेंद्रभाई चाहवाला (अध्यक्ष, वेडरोड वीवर्स एसोसिएशन) द्वारा वित्त मंत्री को दिए गए ज्ञापन की  प्रमुख मांगें और चिंताएं इस प्रकार है। 

1. "मोनोपॉली और कार्टेल" का खतरा: वीवर्स नेता मयूर गोलवाला और मयूर चेवली ने वित्त मंत्री को बताया कि साल 2023 में पॉलिएस्टर यार्न पर BIS और QCO जैसे नियंत्रणों के कारण घरेलू स्पिनरों ने 'सिंडिकेट' बना लिया था, जिससे बुनकरों का शोषण हुआ। यदि नायलॉन पर भी ऐसी ही ड्यूटी लगती है, तो बिजनेस मोनोपॉली फिर से स्पिनरों के हाथ में चली जाएगी।

2. रोजगार पर संकट: वर्तमान में वैश्विक मंदी और अमेरिकन टैरिफ के कारण सूरत की टेक्सटाइल यूनिट्स सप्ताह में केवल 4 दिन चल रही हैं। बुनकर संगठनों का कहना है कि अगर कच्चे माल (इम्पोर्टेड धागे) की लागत बढ़ी, तो हजारों फैक्ट्रियां बंद हो जाएंगी और लाखों कारीगर बेरोजगार हो जाएंगे। बुनकर पहले ही नुकसान के कारण अपनी मशीनें 'स्क्रैप' में बेचने को मजबूर हैं।

3. घरेलू उत्पादन की कमी: वेडरोड वीवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भूपेंद्र चाहवाला ने तर्क दिया कि घरेलू नायलॉन स्पिनर देश की कुल मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं हैं। इसके अलावा, आधुनिक हाई-स्पीड मशीनों के लिए जिस उच्च गुणवत्ता वाले धागे की आवश्यकता होती है, वह घरेलू स्तर पर उपलब्ध नहीं है।

बुनकर नेताओं ने मांग की है कि सरकार को कुछ मुट्ठी भर कॉर्पोरेट स्पिनरों को लाभ पहुँचाने के बजाय, लाखों लोगों को रोजगार देने वाली वीविंग इंडस्ट्री के लिए विशेष 'इंसेंटिव स्कीम' का ऐलान करना चाहिए।

बुनकरों ने नीति आयोग के पूर्व CEO अमिताभ कांत के उस बयान की याद दिलाई जिसमें उन्होंने कहा था कि "QCO और भारी ड्यूटी स्ट्रक्चर भारत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री का गला घोंट रहे हैं।

ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि स्पिनर झूठे आंकड़े पेश कर सरकार को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। यदि बजट में MIP या ADD का प्रावधान किया गया, तो सूरत की छोटी और मध्यम वीविंग यूनिट्स 'युद्ध स्तर' पर बंद होने लगेंगी।