सूरत : जब तक हम दूसरों को पीड़ा पहुंचाते रहेंगे, तब तक स्वयं पीड़ा से मुक्त नहीं हो सकते : डॉ. श्री राजेंद्र दास देवाचार्य जी
यदि कर्मठ और समर्पित नेतृत्व इसी प्रकार मिलता रहा, तो वर्ष 2047 से पूर्व भारत विश्व में अग्रणी स्थान प्राप्त करेगा
कथा आज सायं 4.30 बजे से शुरु होगा, कथा स्थल पर सुबह 8 बजे दिन भर तुलादान चलता रहेगा
आस्तिक-धार्मिक नगरी सूरत के वेसू क्षेत्र में वीआईपी रोड स्थित श्री कामधेनु मंडपम में श्री जड़खोर गोधाम गौशाला के सेवित गोवंश के संरक्षण एवं सेवा के पावन उद्देश्य से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ रही है। क्रोमा के सामने एवं नेक्सा शोरूम के समीप आयोजित इस ज्ञानयज्ञ में सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालु ज्ञानगंगा में गोता लगा रहे हैं।
कथा के मनोरथी श्रीमती गीतादेवी गजानंद कंसल एवं कंसल परिवार हैं। इस अवसर पर मनोरथी परिवार के राकेश कंसल एवं प्रमोद कंसल (सपत्नी) द्वारा व्यासपीठ का विधिवत पूजन किया गया। व्यासपीठ से परम गौ उपासक, करुणामय, वेदज्ञ एवं निर्मल हृदय अनंत श्रीविभूषित श्रीमज्जगद्गुरु द्वाराचार्य अग्र पीठाधीश्वर एवं मलूक पीठाधीश्वर स्वामी डॉ. श्री राजेंद्र दास देवाचार्य जी महाराज (श्री रैवासा-वृंदावन धाम) ने भगवान श्रीकृष्ण एवं गोपियों की रसमयी लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया।
महाराजजी ने अपने प्रवचन में कहा कि जब तक हम दूसरों को पीड़ा पहुंचाते रहेंगे, तब तक स्वयं पीड़ा से मुक्त नहीं हो सकते। हमें सदैव दूसरों को सुख देने की भावना रखनी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि परिवार और समाज में सभी एक-दूसरे को सुख देने का भाव रखें, तो वैर और विरोध का कोई स्थान नहीं रहेगा।
उन्होंने निष्काम भाव से सद्कर्म करने, किसी भी प्राणी को कष्ट न देने और सभी के सुख की कामना करने पर बल दिया। महाराजजी ने कहा कि भगवान भाव के भूखे होते हैं और गोपियों के निष्कपट प्रेम के कारण ही भगवान श्रीकृष्ण उनकी मधुर लीलाओं में वशीभूत हो गए।
चातुर्मास पर प्रकाश डालते हुए महाराजजी ने बताया कि आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक का काल चातुर्मास कहलाता है। इस दौरान पूर्व काल में संतजन एक स्थान पर रहकर सत्संग करते थे, जिससे सनातन धर्म की परंपराएं सुदृढ़ बनी रहीं। उन्होंने आज के समय में भी गांव-गांव और तहसील स्तर पर चातुर्मास सत्संग की आवश्यकता बताई।

महाराजजी ने वर्तमान शासन व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान में जिस तरह कर्मठ और समर्पित शासक भारत को मिले हैं, यदि कर्मठ और समर्पित नेतृत्व इसी प्रकार मिलता रहा, तो वर्ष 2047 से पूर्व भारत विश्व में अग्रणी स्थान प्राप्त करेगा।
प्रमोद कंसल ने जानकारी दी कि बुधवार को षटतिला एकादशी एवं मकर संक्रांति के अवसर पर कथा सायं 4.30 बजे से प्रारंभ होगी, जबकि प्रातः 8 बजे से कथा स्थल पर तुलादान का आयोजन दिनभर चलता रहेगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान कर धर्मलाभ अर्जित करने का आग्रह किया।
मीडिया प्रभारी सज्जन महर्षि ने बताया कि कथा के दूसरे दिन मंगलवार को जय प्रकाश अग्रवाल, दीपक तायल, आलोक तायल, रतन धारुका, राजेंद्र खेतान, सुभाष अग्रवाल (सुभाष साड़ी), राजकिशोर शर्मा, सुनील टाटनवाला, सुभाष अग्रवाल, नरेंद्र भोजक, सुनील गुप्ता, विजय अग्रवाल, अरुण अग्रवाल (संगम साड़ी), नारायण अग्रवाल (प्रफुल्ल साड़ी), किशोर सिंह राजपुरोहित, जगदीश परिहार, विजय चौमाल (पार्षद), तुलसी राजपुरोहित, गणपत उपाध्याय (कोलासर), विपिन जालान, पवन शर्मा (पार्षद लक्ष्मणगढ़) सहित अनेक समाजसेवियों, व्यापारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने महाराजश्री का अभिवादन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
