सूरत : सूरत नवी सिविल के हीमोफीलिया केयर सेंटर ने मुंबई के मरीज़ को दी नई ज़िंदगी
10 लाख रुपये से अधिक का मुफ्त इलाज, निराशा से उम्मीद तक का सफर
एक समय था जब बेहतर इलाज के लिए सूरत के लोग मुंबई और अन्य बड़े शहरों का रुख करते थे, लेकिन अब चिकित्सा क्षेत्र में हुए उल्लेखनीय विकास के चलते सूरत स्वयं असरदार और उन्नत इलाज का केंद्र बनता जा रहा है। इसका ताजा उदाहरण सूरत नवी सिविल अस्पताल में स्थित राज्य के इकलौते डेडिकेटेड हीमोफीलिया केयर सेंटर से सामने आया है, जहां मुंबई के गंभीर हीमोफीलिया A मरीज़ अजय पलांडे (57 वर्ष) को नई ज़िंदगी मिली है।
मुंबई में अजय पलांडे ने वर्ष 2023 में घुटने का रिप्लेसमेंट ऑपरेशन करवाया था, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें एक के बाद एक तीन बार संक्रमण हो गया। असहनीय दर्द और इलाज के बावजूद राहत न मिलने पर वे निराश हो चुके थे। ऐसे में उन्होंने सूरत नवी सिविल के हीमोफीलिया केयर सेंटर से संपर्क किया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने उनका उपचार शुरू किया।
नवी सिविल अस्पताल के यूनिट-2 के प्रो. डॉ. नितिन चौधरी और ऑर्थोपेडिक विभाग की टीम (क्रिस्टीन गामित) की देखरेख में अजय पलांडे का इलाज किया गया। पहली सर्जरी के माध्यम से पैर में फैले संक्रमण को हटाया गया, जबकि दूसरी सर्जरी में घुटने का रिप्लेसमेंट सफलतापूर्वक किया गया। इस दौरान पहली सर्जरी में 38 हजार यूनिट और दूसरी सर्जरी में 33 हजार यूनिट, यानी कुल 71 हजार यूनिट ‘फैक्टर-8’ इंजेक्शन का उपयोग किया गया। गहन उपचार के बाद आज अजय पलांडे पूरी तरह स्वस्थ हैं।
इलाज के बाद अजय पलांडे ने भावुक होते हुए कहा, “सिविल के हीमोफीलिया केयर सेंटर में मिले इलाज से न सिर्फ मेरा पैर ठीक हुआ, बल्कि मेरा आत्मविश्वास भी लौट आया। अगर यही इलाज किसी प्राइवेट अस्पताल में होता, तो मुझे 10 लाख रुपये से ज्यादा का खर्च उठाना पड़ता, जो मेरे लिए संभव नहीं था। यहां मुफ्त इलाज मिलने से मेरे परिवार पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ा। इसके लिए मैं गुजरात सरकार और सूरत सिविल के डॉक्टरों का दिल से धन्यवाद करता हूं।”
उन्होंने यह भी कहा कि हीमोफीलिया A जैसे मरीजों के लिए सामान्य घुटना रिप्लेसमेंट सर्जरी बेहद जटिल होती है, लेकिन सूरत सिविल के डॉक्टरों ने इसे बड़ी कुशलता से संभव कर दिखाया।
हीमोफीलिया केयर सेंटर के मैनेजर निहाल भटवाला ने बताया कि अब सूरत हीमोफीलिया मरीजों के असरदार इलाज का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। बेहतरीन सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की वजह से देश-विदेश से मरीज यहां इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
गौरतलब है कि वर्ष 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सिविल अस्पताल में हीमोफीलिया मरीजों को मुफ्त ‘फैक्टर’ इंजेक्शन उपलब्ध कराने की सुविधा शुरू की थी, जिससे हजारों मरीजों को जीवनदान मिला है।
