सूरत : ओलंपिक मेडल मेरा और परिवार का सबसे कीमती गहना : ओलंपिक चैंपियन मोहम्मद वानिया
टोक्यो डेफ ओलंपिक्स-2025 में सिल्वर और ब्रॉन्ज़ जीतने वाले 20 वर्षीय मोहम्मद ने बचपन की कठिनाइयों को पार कर रचा इतिहास
ओलंपिक मेडल को उत्साह के साथ उठाकर दिखाते हुए 20 वर्षीय मोहम्मद वानिया ने सूरत से यह बात कही। जन्म से बहरे मोहम्मद ने हाल ही में 10वें डेफ ओलंपिक्स टोक्यो-2025 में इंडिविजुअल और मिक्स्ड एयर राइफल शूटिंग में सिल्वर और ब्रॉन्ज़ मेडल जीतकर भारत का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने उन्हें बधाई दी है।
सूरत के मोहम्मद वानिया का जीवन संघर्षों और जज़्बे की प्रेरणादायक कहानी है। जन्म से बहरे मोहम्मद का चार साल की उम्र में कॉक्लियर इम्प्लांट ऑपरेशन हुआ। उसी उम्र में उन्होंने पहली बार आवाज़ें सुनीं और अपना पहला शब्द बोला—जबकि सामान्य बच्चे उसी उम्र में धाराप्रवाह बोल रहे होते हैं। लेकिन जैसा कहा जाता है, जहाँ चाह, वहाँ राह मोहम्मद ने चुनौतियों को अपनी प्रगति की सीढ़ियाँ बनाया।
वह फिलहाल एक पब्लिक यूनिवर्सिटी में B.Sc IT के प्रथम वर्ष के छात्र हैं। उनकी माँ रजिया वानिया बताती हैं कि बचपन से ही मोहम्मद को खेलों में गहरी दिलचस्पी थी। वह हर खेल में अच्छा प्रदर्शन करते थे, पर बोलने में कठिनाई के कारण उनमें आत्मविश्वास की कमी रहती थी। इसी कमी को दूर करने के लिए उनके पिता ने उन्हें खेलों की ओर प्रोत्साहित किया। मोहम्मद ने टेबल-टेनिस, स्विमिंग और रेसिंग जैसे कई खेल आज़माए और शानदार प्रदर्शन भी किया।
लेकिन तेज़ फिजिकल एक्टिविटी और अनिश्चित माहौल के चलते उनकी ईयर मशीन में बार-बार दिक्कतें आती थीं। इसलिए उन्होंने अपनी रुचि के अनुसार शूटिंग को चुनकर गंभीरता से ट्रेनिंग शुरू की।
पहली बार जिला स्तर की प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतने के बाद मोहम्मद का लक्ष्य तय हो गया। उसके बाद उन्होंने खेल महाकुंभ में सिल्वर मेडल जीता और पिछले चार वर्षों की निरंतर मेहनत ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचा दिया। उनकी सफलता में उनके कोच सागर उखारे का मार्गदर्शन भी अहम रहा।
अपनी उपलब्धियों का श्रेय माता-पिता को देते हुए मोहम्मद भावुक होकर कहते हैं कि मेरी माँ ने मेरी देखभाल के लिए नौकरी छोड़ दी। मेरे पिता ने समय और पैसा—सब कुर्बान किया। वे हर कदम पर मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहे, तभी मैं यहाँ तक पहुँचा हूँ।” वे सभी युवाओं को संदेश देते हैं कि “हौसला रखो, मेहनत करते रहो… सफलता रास्ता बनाकर खुद आ जाएगी।”
