पेट्रोल डीज़ल को लेकर ये क्या कह गई निर्मला सीतारमण, बढ़ती कीमतों के लिए पिछली सरकार को ठहराया दोषी

तेल बांड का जिक्र करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा हम पिछली सरकार के फैसलों का भार उठा रहे हैं।"

पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने महंगे ईंधन के लिए पिछली सरकार यानी यूपीए सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। इस बारे में बात करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा "हम पिछली सरकार के फैसलों का भार उठा रहे हैं।" साथ ही उन्होंने निकट भविष्य में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में गिरावट की संभावनाओं को नकारते हुए जानकारी दी कि पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क कम होने की संभावना नहीं है।
आपको बता दें कि सोमवार को एक लीटर पेट्रोल की कीमत 3 रुपये कम करने पर तमिलनाडु सरकार के एक सवाल का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि मनमोहन सिंह सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों को कम करने के लिए 1.44 लाख करोड़ रुपये के तेल बांड की घोषणा की थी। जिसका भुगतान हमें करना पड़ रहा है।  उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2021 तक 1.31 लाख करोड़ रुपये बकाया था। सरकार को 2026 तक ब्याज में 37,340 करोड़ रुपये चुकाने हैं। ऐसे में एक्साइज ड्यूटी घटाकर पेट्रोल-डीजल के दाम कम करना संभव नहीं है।
(Photo : IANS)
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले पांच वर्षों में तेल बांड पर ब्याज में 70,196 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।  यूपीए सरकार ने 2005-2009 के दौरान तेल बांड जारी करके धन जुटाया है। नतीजतन, 2008 में वित्तीय संकट के बावजूद, ईंधन की कीमतों में वृद्धि नहीं हुई। यूपीए सरकार ने तेल बांड की घोषणा की और तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) से उधार लिया। वर्तमान सरकार को इसका भुगतान करने में कठिनाई हो रही है।
केंद्र सरकार का यह बयान ऐसे समय आया है जब तमिलनाडु सरकार ने फ्यूल टैक्स में 3 रुपये की कटौती की है। ऐसे में के घोषणा के बाद राज्य सरकार को हर साल 1,160 करोड़ रुपये का नुकसान होगा।
आपको बता दें कि देश में पेट्रोल का बेस प्राइस 41 रुपये और डीजल का 42 रुपये है। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए टैक्स से देश के कई हिस्सों में इसकी कीमत 110 रुपये को पार कर गई है। केंद्र सरकार पेट्रोल पर 33 रुपये और डीजल पर 32 रुपये का उत्पाद शुल्क लगाती है। जिसके बाद राज्य सरकार उस पर अपने तरीके से वैट और सेस लगाती है। इससे पेट्रोल-डीजल की कीमत बेस प्राइस से 2 गुना ज्यादा बढ़ जाती है। देश पेट्रोल पर 56 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 45 रुपये प्रति लीटर से अधिक शुल्क लेता है। ऐसे में देश के कई शहरों में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये और डीजल की कीमत 90 रुपये के पार पहुंच गई है। हालांकि, जब से हरदीप सिंह पुरी नए पेट्रोलियम मंत्री बने हैं, तब से कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। 18 जुलाई से लगातार 29 दिनों तक कीमतों में न तो कोई बढ़ोतरी हुई है और न ही गिरावट आई है। दिल्ली में आईओसी पंपों पर पेट्रोल 101.84 रुपये प्रति लीटर और डीजल 89.97 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है।

 तेल बांड क्या हैं?
2005 से 2009 तक केंद्र सरकार ने 4 लाख करोड़ रुपये के तेल बांड जारी किया था। तेल बांड जारी करने का मतलब है कि किसी भी सामान की खरीद पर नकद भुगतान नहीं करना है, बल्कि एक पत्र पर लिखना है कि भविष्य में ब्याज सहित पूरी कीमत का भुगतान किया जाएगा। जिससे सरकार को यह फायदा होता है कि उन्हें तुरंत भुगतान नहीं करना पड़ता है। ये बांड एक विशिष्ट अवधि के लिए जारी किए गए थे। उस समय ईंधन पर सब्सिडी दी जाती थी। हालांकि ग्लोबल मार्केट में रेट जो भी हो, सरकार इसे अपने तरीके से तय करेगी।  2008 की वैश्विक मंदी में जब तेल कंपनियों की स्थिति खराब हुई तो उन्होंने तेल बांड के बजाय सरकार से मुकदमे की मांग करना शुरू कर दिया। जिसके बाद 2010 में तेल बांड भुगतान प्रणाली को बंद कर दिया गया था। जानकारी के लिए बता दें कि 2005 और 2009 के बीच जारी किए गए बांड 2022 और 2026 के बीच समाप्त हो रहे हैं।

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