दो साल से मंदिर के बाहर बैठ कर मांगता था भीख, निकला करोड़ों का मालिक

नशे की लत ने बनाया भिखारी, दो साल से मंदिर के बाहर भीख मांगता रहा यह भिखारी

कहते हैं ना की किसी भी चीज की आदत लग जाए तो वह छुटाए नहीं छूटती। जिसकी वजह से कई बार मनुष्य का जीवन भी खराब हो जाता हैं। कई बार खराब आदत के चलते रिश्तो में भी दरार आ जाती हैं। नशे का शिकार हुये व्यक्ति का जीवन उसके वास्तविक मृत्यु के पहले ही खत्म हो जाती हैं। आपने भी कई ऐसे किस्से सुने होंगे। जहां नशे की आदत के कारण मनुष्य का पतन हुआ हो। कुछ ऐसी ही कहानी हैं भिक्षुक रमेश यादव की, जिनकी नशे की आदत ने उन्हें दरबदर भटकने का मोहताज बना लिया। 
खुद एक करोड़पति होने के बावजूद रमेश यादव पिछले दो सालों से मंदिर के बाहर भीख मांग रहे हैं। फिलहाल वह केंद्र सरकार द्वारा आयोजित दिनबंधु पुनर्वसन योजना के तहत चल रहे एक कैंप में हैं। इस शिबीर में अब तक कुल 100 से भी ज्यादा लोगों को लाया गया हैं, जिन्हें उनके परिवार वालों ने अपने घर से निकाल दिया हैं। यही कारण हैं कि वह रास्ते में भीख मांगने पर विवश हुये हैं। 
घर पहुंचे तो हुये दंग
रूपाली जैन जो कि इस योजना के साथ जुड़ी हुई हैं, बताती हैं कि रमेश यादव को उनके यहाँ इंदौर के काली मंदिर से लाया गया था। उन्होंने शादी नहीं की थी, पर उनके भाई और भतीजे अब भी जिंदा हैं। उनकी टीम जब उनके घर गई तो पहुँचकर चौंक उठी। वहाँ उस घर के एक रूम में तो चार लाख का सिर्फ सामान था। घर में एसी सहित सभी सुख सुविधा की छीजे मौजूद थी। यही नहीं उनके घर की बनावट से वह कैफ मॉडर्न स्टाइल का भी मालूम हुआ। पर अपनी दारू पीने की बुरी आदत के कारण वह भिक्षुक बन गए। 
रमेश यादव के पास आय का कोई स्त्रोत होने के कारण वह मंदिर में बैठ कर भीख मांगने लगे। भीख में मिले पैसे वह नशे में खर्च कर देते थे। पर अब उनका कहना हैं कि वह घर बैठ कर काम करेंगे। वहीं उनके परिवार के अन्य सदस्यों का भी कहना हैं कि यदि उनकी शराब की आदत सही हो जाए तो वह उसे रखने को तैयार हैं। रूपाली जैन का कहना हैं कि उनकी परिस्थिति में काफी ज्यादा सुधार देखने मिला हैं। इसके अलावा शिबीर में मौजूद अन्य लोगों के बारे में बताते हुये वह कहते हैं कि 90 प्रतिशत लोग नशे के गुलाम हैं। किसी को शराब का नशा हैं तो किसी को ड्रग्स का। उन सभी को नशा मुक्ति केंद्र में भेजा गया हैं। जिसका एक रिपोर्ट जिला कलेक्टर को भेजा जाएगा। 

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