पारंपरिक मिठाई वाले सतर्क हो जाएं, देश में चॉकलेट का चलन बढ़ रहा है!

पिछले वर्ष की एक अंक की वृद्धि की तुलना में चॉकलेट के आयात में इस साल 25 प्रतिशत की वृद्धि

जल्द ही अब भारत में त्याहौरों का सीजन शुरू होने जा रहा है। त्यौहार मतलब मज़े करना और जमकर मिठाई खाना! त्यौहार बिना मीठे के अधुरा ही है। अब भारतीय पारंपरिक मिठाइयों के बजाय चॉकलेट का सेवन कर रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप देश ने वित्त वर्ष 22 के दौरान चॉकलेट के आयात में पिछले वर्ष की एक अंक की वृद्धि की तुलना में 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है।
आपको बता दें कि भारत में त्योहारों पर मिठाई की जगह चॉकलेट देने का चलन बढ़ता जा रहा है। चॉकलेट के आयात में वृद्धि का एक अन्य कारण देश में कोको का कम उत्पादन है जो चॉकलेट की बढ़ती मांग को पूरा करने में विफल रहा है। भारतीयों के बदलते स्वाद और बदलती जीवन शैली के कारण चॉकलेट तेजी से भारत में पारंपरिक मिठाइयों की जगह ले रही है। इनमें भारतीयों को इंपोर्टेड चॉकलेट खाने का बहुत शौक होता है। भारत का चॉकलेट बाजार, दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक, 2021 में 2।2 बिलियन अमरीकी डालर को छू गया, जो अब 2027 तक 3।8 बिलियन अमरीकी डालर तक पहुंचने की उम्मीद है, जो 9।1 प्रतिशत की सीएजीआर से बढ़ रहा है।
काजू और कोको विकास निदेशालय (DCCD) के अनुसार, भारत पिछले कई वर्षों से चॉकलेट की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कोको आयात पर निर्भर है। जिसका आयात 10 साल पहले 50,000 टन था, तीन साल पहले 5 से 10 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर के साथ 80,000 टन को पार कर गया। पिछले साल पहली बार इसका आयात 1 लाख टन को पार कर गया था।
एक रिपोर्ट के मुताबिक चॉकलेट इंडस्ट्री पर कोरोना महामारी का कोई असर नहीं पड़ा है। खुदरा दुकानों के बंद होने से जहां ऑफलाइन बिक्री प्रभावित हुई वहीं दूसरी ओर घरेलू खपत में भारी इजाफा देखने को मिला। बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता का लाभ उठाते हुए, चॉकलेट कंपनियां अभिनव विपणन के माध्यम से उपभोक्ताओं को आकर्षित करने की कोशिश कर रही हैं।

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