ऐसे हुआ खतरनाक आतंकी मोड्यूल का खुलासा, जानें पाकिस्तान में बैठे आका ऐसे तैयार करते हैं अपराधी!

प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo Credit : Pixabay.com)

‘कालुपुरवाला काम हो गया!’ वाले एक लाईन के संदेश से अहमदाबाद पुलिस ने ऐसे खोली रहस्यों की गुत्थी, विदेश से हो रहा था पूरा काम

अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर संजय श्रीवास्तव को कुछ दिनों पहले एक एजेंसी द्वारा की गई इंटरसेप्टेड फोन कॉल की सूचना मिली थी, जिसमें एक लाइन का संदेश भेजा गया था जिसमें कहा गया था कि कालूपुरवाला काम हो गया है। हालांकि पुलिस आयुक्त संजय श्रीवास्तव खुद इन फोन कॉलों का विवरण प्राप्त करने के बाद आश्चर्यचकित हो गए क्योंकि कालूपुर में ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी। इसके बाद भी कमिश्नर ने क्राइम ब्रांच को मामले की जांच करने का आदेश दिया। इस जाँच में गुजरात के क्राइम ब्रांच ने गुजरात सहित देश के विभिन्न शहरों में फैले पाकिस्तानी जासूसी एजेंसी के जालों का पर्दाफाश किया। क्राइम ब्रांच ने ISI द्वारा बनाए गए मॉड्यूल का पता लगाया है और इसके लिए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है और राष्ट्र के प्रति अनैतिक और गैरकानूनी गतिविधि का मामला दर्ज किया है।
एक-लाइन संदेश के आधार पर पुलिस आयुक्त संजय श्रीवास्तव को अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त प्रेमवीर सिंह और पुलिस उपायुक्त चैतन्य मांडलिक ने जांच शुरू की। एसीपी डीबी चुडासमा और पुलिस इंस्पेक्टर निखिल ब्रम्हभट्ट ने जांच शुरू कर दी। हालांकि, पहले तो कालूपुर में ऐसी कोई घटना सामने नहीं आई थी, लेकिन कालूपुर पुलिस ने केवल इस बात की जानकारी मांगी कि रेवाड़ी बाजार की सात दुकानों में आग लग गई थी और यह सिर्फ एक दुर्घटना थी।
क्राइम ब्रांच की टीम के इंस्पेक्टर ब्रह्मभट्ट अंधेरे में आग लगने की सीसी फुटेज देखना शुरू कर दिया और इसी से उन्हें पहली कड़ी मिल गई जिसमें यह स्पष्ट हो गया कि आग अपने आप नहीं लगी जबकि तीन युवक आग लगाने आए थे। पेट्रोल की बोतलें ले जा रहे युवकों ने बाजार में आग लगाई थी। हालांकि आग में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन 54 लाख रुपये का नुकसान हुआ। फुटेज में दिख रहे एक्टिवा स्कूटर के आधार पर क्राइम ब्रांच ने भूपेंद्र उर्फ प्रवीण वंजारा को पकड़ लिया। शहर के अमराईवाड़ी इलाके में रहने वाला भूपेंद्र को क्राइम ब्रांच लेकर आया गया जहाँ भूपेंद्र पुलिस की मार बर्दाश्त नहीं कर पाया। इसके बाद जब भूपेंद्र ने अपना मुंह खोला, तो अपराध शाखा अधिकारी के पैरों तले जमीन खिसक गई।
अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर IPS संजय श्रीवास्तव (Photo Credit : iamgujarati.com)
भूपेंद्र के कबूलनामे के मुताबिक, पिछले साल लॉकडाउन के दौरान वह फेसबुक के जरिए भाई उर्फ बाबा भाई उर्फ बाबाभाई कंपनी के संपर्क में आया था। वह व्यक्ति, जिसने खुद को भाई के रूप में बताया उसने भूपेंद्र से संपर्क करने के बाद उसकी वित्तीय स्थिति के बारे में उससे पता कर लिया। उस समय भूपेंद्र बहुत बुरी हालत में था। वो ब्याज के चक्कर में फंसा हुआ था। सूदखोर भूपेंद्र सहित उसके परिवार को परेशान कर रहे थे। ऐसे में बाबाभाई ने भूपेंद्र को सलाह दी कि अगर वो समाज की गन्दगी को साफ करता है तो बाबा उसे पैसे दे देगा। 
भूपेंद्र पैसे के लिए कुछ भी करने को तैयार था। बाबा भाई ने उससे कहा कि तुम्हे किसी को मारना है और इसके लिए वो भूपेंद्र  को चार लाख रुपये देगा। किसे मारना है यह भी उसे खुद ही तय करना था।  भूपेंद्र और बाबाभाई फेसबुक मैसेंजर और विभिन्न ऐप का उपयोग करते हुए एक-दूसरे के संपर्क में थे। एक ओर ब्याज का चक्र था और बहुत सारे धन की आवश्यकता थी इसलिए भूपेंद्र किसी को मारने के लिए तैयार हो गया। लेकिन उसकी समस्या यह थी कि उनके पास हथियार नहीं था, जब भूपेंद्र ने एक हथियार मांगा, तो बाबाभाई का संदेश आया कि मध्य प्रदेश का कोई व्यक्ति उनसे संपर्क करेगा और एक हथियार देगा।
बाबा के निर्देश के अनुसार, मध्य प्रदेश के व्यक्ति से संपर्क किया गया, लेकिन उसने हथियार के रूप में 14,000 रुपये की मांग की। भूपेंद्र के पास पैसे नहीं थे, इसलिए उसने फिर से बाबा से पैसे मांगे और बाबा ने अलग-अलग लेनदेन से भूपेंद्र के खाते में 25,000 रुपये भेजे। जब पैसा आया तो भूपेंद्र मध्य प्रदेश जाकर पर तमंचा लेने पहुंचा। लौटते समय  भूपेंद्र को खेड़ा पुलिस ने पकड़ लिया और फिर उसे एक सप्ताह तक जेल में रहना पड़ा। जब भूपेंद्र जेल से जमानत पर रिहा तो वह फिर से दूत के माध्यम से बाबा भाई के संपर्क में आए, तो बाबा ने कहा कि हत्या नहीं होगी लेकिन अगर तुम कुछ बड़ा करते हैं, तो वह उसे पैसे देगा। 
भूपेंद्र पूर्वी इलाके में रहता था और उसे रेवड़ी बाजार का पता था। भूपेंद्र ने कहा कि रेवड़ी बाजार में आग लगी तो बड़ा नुकसान होगा। बाबा ने उन्हें इस काम के लिए 1.5 लाख रुपये देने का वादा किया। इसके बाद 20 मार्च को भूपेंद्र अपने दो दोस्तों अनिल खटीक और अंकित पाल के साथ रेवड़ी बाजार गया और दुकानों में आग लगा दी, जिसका उन्होंने वीडियो बनाया और बाबा को भेजा। इस काम के होने पर बाबा ने रमेश कांति अ फर्म द्वारा भूपेंद्र को 1.5 लाख रुपये भेजे थे, जिसमें से भूपेंद्र ने 80,000 रुपये रखे और बाकी रुपये अंकित और अनिल को दिए। इस जानकारी के आधार पर क्राइम ब्रांच ने अंकित और अनिल को पकड़ लिया।
जाँच में सामने आई अंतर्राष्ट्रीय गिरोह की जानकारी
अब क्राइम ब्रांच के लिए यह जानना जरूरी था कि ये बाबा कौन था। जब क्राइम ब्रांच ने तकनीकी निगरानी शुरू की, तो बाबा भाई की लोकेशन अलग देश से मिली। क्राइम ब्रांच ने मुंबई में कांति रमेश अंगड़िया फर्म से संपर्क किया और अहमदाबाद में 1.5 लाख रुपये भेजने वाले के बारे में जानकारी ली और पता चला कि 15 लाख रुपये दुबई से आए थे। इनमें से डेढ़ लाख को अहमदाबाद भेजने का निर्देश दिया गया था। लेकिन दुबई से पैसे भेजने वाले की जांच की तो पता चला कि पैसा खोझा नाम के व्यक्ति द्वारा भेजा गया था।
खोजा से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि यह धन कांगो देश से उनके पास आया था। इस प्रकार पूरी घटना के तार अंतरराष्ट्रीय स्तर के थे। भूपेंद्र से पूछताछ में बाबा ने दिल्ली के सद्दाम का जिक्र किया जो उसके संपर्क में आया था। फिर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई कि भूपेंद्र की तरह बाबा ने सद्दाम को पैसे का लालच दिया और कहा कि वह किसी को भी मारे। सद्दाम ने दो लोगों को मार डाला। इस प्रकार, पाकिस्तान स्थित आईएसआई को भारत के युवाओं को पैसे के लालच में पहले छोटा गुनाह कराने के बाद एक बड़ी घटना को अंजाम देने से पहले तीन युवक पकड़ में आ गए गए हैं।
आंगड़िया फर्म के अनुसार, दुबई से आने वाला पैसा गुजरात के सूरत, वडोदरा और भावनगर के साथ-साथ दिल्ली, मुंबई और बैंगलोर को भेजा जाता था। इस प्रकार बाबा ने देश के कई शहरों में अपने अलग मॉड्यूल तैयार किए हैं। इस जानकारी से केंद्रीय एजेंसी की चिंता बढ़ी हुई है।
(- प्रशांत दयाल - खबरछे.कॉम से साभार)

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