पाकिस्तान के खिलाफ हुए युद्ध के हीरो ने अब जा कर चुकाई अपनी 68 साल पुरानी उधारी

(Photo Credit : new18.hindi.com)

सेवानिवृति के बाद कई वर्षों से अमेरिका में रहने वाले बीएस उप्पल ने हिसार आकर चुकाई अपनी उधारी

आज के समय में आए दिन कोई न कोई हैरान कर देने वाली खबर सामने आ जाती है। इस समय हरियाणा से एक मजेदार खबर सामने आयी है। सेना के एक रिटायर्ड अफसर ने अब जाकर अपनी 68 साल पुरानी उधारी चुकाई है। यह कहानी है हिसार के रिटायर्ड नौसेना कमांडर बीएस उप्पल और एक हलवाई की।
जानकारी के अनुसार पिछले कई सालों से अमेरिका में रह रहे 85 वर्षीय बीएस उप्पल सेवानिवृति के बाद वह अपने बेटे के पास जाने के बाद उनका कभी भारत या हिसार आना नहीं हो पाया। हाल ही में जब वह हिसार लौटे तो यहां पहुंचकर सबसे पहले हिसार के मोती बाजार स्थित ‘दिल्ली वाला हलवाई’ की दुकान पर गए। ये किस्सा उस समय की है जब ये दुकान वर्तमान मालिक विनय बंसल के दादाजी शंभु दयाल बंसल सँभालते थे। ये दुकान उन्होंने ही शुरू की थी। उस समय बीएस उप्पल स्कूल में पढ़ते थे और अक्सर इस दुकान से दही-पेड़े खाया करते थे। दुकान पर पहुँच कर उन्होंने विनय को बताया कि 1954 में उन्होंने उनके दादा शम्भू दयाल बंसल से 28 रुपये की उधारी की थी। वह उनकी दुकान से लस्सी में पेड़े डालकर पीते थे, जिसके 28 रुपये उन पर बकाया रह गए थे, लेकिन उस समय उन्हें शहर से बाहर जाना पड़ा और फिर उनकी भर्ती नौसेना में हो गई। सेना में नौकरी के दौरान उन्हें कभी हिसार आने का मौका नहीं मिला और रिटायरमेंट के बाद वह अपने बेटे के पास अमेरिका चले गए थे।
आपको बता दें कि जब न्यूसज़ 18 से बीएस उप्पल से इस बारे में बात की तो उन्होंने इन बातों को हमेशा याद रखा। अमेरिका में भी उन्हें हिसार की सिर्फ दो बातें याद आती थीं। एक तो 28 रुपये की उधारी और दूसरा अपना हरजीराम हिन्दू हाई स्कूल, जहां से उन्होंने दसवीं पास की थी। इसके साथ उन्होंबने कहा कि 68 साल बाद वह खासतौर पर अपने स्कूल को देखने और अपनी उधारी चुकाने हिसार लौटे हैं। अपनी उधारी चुकाते हुए बीएस ने विनय बंसल के हाथ में दस हजार की राशि रखी। पहले तो विनय ने लेने से मना किया, लेकिन बीएस के कई बार कहने पर विनय ने पैसे स्वीकार किए। यह पल बीएस उप्पल और विनय बंसल दोनों के लिए बहुत ही भावुक था। इसके बाद बीएस उप्पल अपने स्कूल को देखने पहुंचे, लेकिन अब यह स्कूल बंद पड़ा है, इसलिए उन्हें निराश लौटना पड़ा।
आपको बता दें कि बीएस उप्पल ने भारत-पाक युद्ध में विशेष भूमिका निभाई थी। दरअसल उप्पल उस पनडुब्बी के कमांडर थे जिसने भारत-पाक युद्ध के दौरान पाकिस्तान के जहाज को डुबो दिया था। इसके बाद वह अपनी पनडुब्बी व नौ सैनिकों को सुरक्षित ले आए थे। इस बहादुरी के लिए भारतीय सेना ने उन्हें बहादुरी के नौसेना पुरस्कार से सम्मानित भी किया था।

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