परिवार वाले छोड़ कर चले गए बुजुर्ग को अकेला, पुलिस ने इस तरह पहुंचाया घर

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आंखो से कमजोर बुजुर्ग की जांच करवाकर पहुंचाया बेटी और दामाद के पास, दी मानवता की अनोखी मिसाल

आज कल संतानों द्वारा ढलती उम्र में अपने बुजुर्ग माता-पिता को छोड़ देने की कई घटनाएँ सामने आती है। ऐसा ही एक और मामला शिमला में सामने आया था, जहां एक 85 वर्षीय बुजुर्ग, जिसे उसके परिवार वाले बेसहारा छोडकर चले गए थे। उस बुजुर्ग को पुलिस ने उसकी बेटी और दामाद के पास पहुंचाया था। रिपोर्ट के अनुसार, शिमला के आईजीएमसी में चार दिन पहले एक 85 वर्षीय एक व्यक्ति को उसके परिवार ने लावारिस छोड़ दिया था। जहां शिमला पुलिस उस बुजुर्ग के लिए देवदूत बनके सामने आई और बुजुर्ग को कुल्लू पुलिस की सहायता से उनकी बेटी का पता ढूंढ कर बुजुर्ग को बेटी और दामाद को सौंपा। 
विस्तृत जानकारी के मुताबिक, डोवी कुल्लू निवासी 85 वर्षीय तेलू राम को चार दिन पहले इलाज के बहाने परिवार शिमला ले आया था। हालांकि इसके बाद उन्होंने बुजुर्ग को वही छोड़ दिया और वहाँ से चले गए। परिवार द्वारा त्यजित तेलू राम आईजीएमसी के पास यहाँ-वहाँ भटक रहे थे। तेलू राम की आंखों की रोशनी भी कम थी और वह देख नहीं सकते थे। किसी व्यक्ति ने इस बारे में पुलिस को जानकारी दी और पुलिस ने वहाँ पहुँचकर तेलू राम की सहायता की। शिमला पुलिस ने कुल्लू पुलिस को सूचना दी, जिससे की बुजुर्ग की बेटी का पता ढूंढा गया। इसके बाद बेटी और दामाद को लेकर एक पुलिसकर्मी शिमला पहुंचा। बुजुर्ग के पास बस पास था और सरकार से पेंशन भी मिल रही थी। 18 साल पहले उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी। इस दौरान पुलिस ने आँख के डॉक्टर से तेलू राम की जांच भी करवाई। इसके बाद तेलू राम के बस स्टेंड तक पहुँचने के लिए एक एम्ब्युलेंस की भी व्यवस्था की। 
आज जहां चारों और बेईमानी और विश्वासघात का माहौल है ऐसे में शिमला पुलिस का यह कृत्य लोगों में मानवता के प्रति फिर से आस्था जगा रहा है। जिस तरह से शिमला पुलिस ने बुजुर्ग की बेटी का पता ढूंढ कर उनको अपनी बेटी से मिलवाया और बुजुर्ग की आंखो की जांच करवाई। इस तरह के कृत्यों से लोगों में भी पुलिस की इज्जत बढ़ जाती है। 

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