सूरत : तेलंगना की बहनें नवरात्रि को बहुत ही अलग तरीके से मनाती है

लिंबायत में बतुकम्मा पुर्व पर गरबा खेलती तेलंगना की बहने

सूरत शहर में गुजराती गरबा के साथ लिंबायत क्षेत्र में तेलंगना की बहने बतुकम्मा पर्व गरबा खेलकर मनाती है

सूरत मिनी भारत है इस शहर में सभी प्रांत के लिए अपने अपने त्यौहार सौहार्दपुर्ण माहौल में मनाते है
सूरत तेलंगाना राज्य से रोजी रोटी के लिए सूरत शहर में आये तेलुगु लोग नवरात्रि पर्व बहुत ही भक्तिभाव से मनाते हैं।  यह त्योहार तेलुगु लोगों द्वारा बतुकम्मा पंडुगा के रुप में मनाया जाता है । बटुकम्मा पर्व के पहले दिन 6-10-21 को  एंगिली पूजा बतुकम्मा और अंतिम दिन यानी 15-10-2021 को सदुला बटुकम्मा के रुप में मनाया जाता है। 
बतुकम्मा पर्व के बारे में सूरत में तेलगु समाज के अग्रणी रापोलु बुच्चीरामोलु मास्तर ने जानकारी देते हुए कहा कि बतुकम्मा पंडुगा पर्व मनाने के पिछे दो दंत कथाए प्रचलित है। सदियों पहले, चोलुडु" एक  राजा था। उपवास और उपवास जैसी कई धार्मिक गतिविधियों, देवी देवताओं से प्रार्थना करते के बाद उनके यहा बच्ची का जन्म हुआ। उस राजा ने भविष्य में अपनी बेटी पर कोई आफत नही आए इस लिए देवी से प्रार्थना की। देवी के आग्रह से पुत्री का नाम बतुकम्मा रखा जिसका अर्थ प्राण  जीव देनेवाली माता होता है उसका विशेष अर्थ दुख दुर करनेवाली माता भी होता है। दुसरी पौरणिक कथानुसार 19 वीं शताब्दी के अंत में विविध प्रांत में अनावृष्टि, विविध रोग व्याधी, से कई लोगों की मौत हुई। उस व्यापी महामारी से बचने के लिए लोगों ने जिस देवी की पूजा अर्चना की वह देवी है बतुक्म्मा। 'बटुकम्मा' उत्सव में दो चरणों में गरबा होता है। ते हैं। नवरात्रि के पहले दिन से आठम तक कुमारीकाए गरबा में भाग लेती है। जिसे बोडम्मा कहा जाता है। इस त्यौहार के दुसरे चरण में यानी आठवे दिन कुमारिकाओं के साथ महिलाए भी गरबा करती है।

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