सूरत : तापी में दुलर्भ हिरण की तस्करी करने वाले का हुआ पर्दाफाश, वन विभाग ने एक आरोपी को हिरण के दो बच्चों के साथ पकड़ा

प्रतिकारात्मक तस्वीर

दुर्लभ जानवरों का घर है गुजरात का तापी जिला, दस हजार के लिए बेचे जा रहे थे दुर्लभ हिरण

गुजरात का तापी जिला वनाच्छादित इलाका है। इस क्षेत्र में शेड्यूल-1 वाले जानवर बड़े आसानी से देखे जा सकते हैं। वन विभाग द्वारा घोषित अनुसूची-1 में शामिल हिरण के बच्चे की तस्करी के एक आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की है।
आपको बता दें कि 33% वन क्षेत्र वाले तापी जिले में पैंगोलिन, हिरण, चोसिंगा हिरण सहित अनुसूची-1 के जानवरों का घर है, और यहाँ इन जानवरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह से वन विभाग की है। अब वन विभाग ने चौसिंघा हिरण की तस्करी का पर्दाफाश किया है। वन विभाग ने 2 चौसिंघा हिरण के बच्चों को रेस्क्यू कर वन विभाग के रेस्क्यू सेंटर में रखा है। इस आपराधिक गतिविधि में आरोपी भीमसिंह वसावा को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में वन विभाग ने आरोपी की तीन दिन की रिमांड मांगी थी लेकिन कोर्ट ने आरोपी को जमानत पर रिहा कर दिया है। फिलहाल वन विभाग विभिन्न अन्य मुद्दों को सुलझाने में लगी है।
तापी जिला दुर्लभ जानवरों का घर है। उस समय दक्षिण गुजरात में दुर्लभ चौसिंघा हिरण की तस्करी का पर्दाफाश हुआ है। इस मामले में खेरवाड़ा के गांवतलाव फलिया में अत्यंत दुर्लभ हिरण मिलने की जानकारी जिला डीसीएफ को मिली थी। जानकारी एक बाद उन्होंने एक टीम बनाई और छापेमारी की। इस छापेमारी में टीम को दो हिरण के बच्चे मिले। जिन्हें पांच-पांच हजार कुल दस हजार की कीमत पर बेचा जाना था। सुरक्षित बचाए गये शावक मुश्किल से 6 महीने के है। वहीं, एक व्यक्ति को हिरण के बच्चों की अवैध रूप से तस्करी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
यह हिरण चौसिंघा प्रजाति का है। इन हिरणों के बच्चों को मांसाहारी लोगों की दावत के लिए बेचा जाता था। आरोपी चंद रुपये के लिए जंगल से हिरण लाता था और बेच देता था। इसके बाद मांसाहारी लोग इस दुर्लभ जानवर को मार देते थे। गौरतलब है कि अनुसूची 1 के जानवर को मारने या तस्करी करते हुए पकड़े गए व्यक्ति को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अनुसार न्यूनतम 3 साल और अधिकतम 7 साल की सजा होती है। साथ ही न्यूनतम जुर्माना 10,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक होता है।

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