सूरत : सड़क दुर्घटना में ब्रेनडेड हुए प्रयाग ने अंगदान से सात लोगों को दी नई जिंदगी

(Photo Credit : gujarati.news18.com)

बाइक से मुंबई जा रहे प्रयाग गाड़ी का टायर फटने से हुए थे चोटिल, मस्तिष्क में सूजन और रक्त के थक्के के साथ-साथ रीढ़ की हड्डी में हुआ था फ्रैक्चर

लेउवा पटेल समाज के प्रयाग हंसराजभाई घोनिया ने महज 23 साल की उम्र में इस नश्वर संसार को अलविदा कह दिया हैं। हंसराज के ब्रेन डेड हो जाने पर उनके परिवार ने उसके अंग दान करने का एक बहुत ही महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यूनिटी अस्पताल के डॉक्टरों ने सोमवार 15 नवंबर को प्रयाग को ब्रांडेड घोषित कर दिया। डोनेट लाइफ की टीम अस्पताल पहुंची और अंगदान का महत्व और प्रयाग के परिवार को पूरी प्रक्रिया के बारे में बताया। परिवार ने डोनेट लाइफ के जरिए अपने बेटे का दिल, फेफड़े, किडनी, लीवर और आंखें दान कर सात लोगों को नई जिंदगी दी है। इस पाटीदार परिवार ने समाज को मानवता की एक नई दिशा दिखाई। इस अंगदान में प्रयाग का दिल अहमदाबाद के सिम्स अस्पताल में इलाजरत भुज निवासी एक 29 वर्षीय व्यक्ति को दिया गया। इसके लिए सूरत के यूनिटी अस्पताल से अहमदाबाद तक का 276 किमी की दूरी 110 मिनट में तय किए गया और इसके बाद हृदय प्रत्यारोपण हुआ है। वहीं सूरत से चेन्नई के बीच 1610 किमी की दूरी 210 मिनट में तय करने के बाद फेफड़े का प्रत्यारोपण चेन्नई के एमजीएम अस्पताल में इलाजरत और मूल सूडान के 23 वर्षीय युवक के लिए हुआ।
सूरत के डिंडोली में करडवा गांव के श्री दर्शन रोहाउस में रहने वाले और ऑनलाइन साड़ी बेचने के कारोबार से जुड़े प्रयाग 7 नवंबर को अपने दोस्तों के साथ मोटरकार में मुंबई से सूरत की यात्रा कर रहे थे जिस दौरान रास्ते में टायर फटने से उनके सिर और रीढ़ की हड्डी में चोट लग गई। इलाज के दौरान ब्रेन हेमरेज के लिए सीटी स्कैन से मस्तिष्क में सूजन और रक्त के थक्के के साथ-साथ रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर का पता चला। 14 नवंबर को न्यूरोसर्जन डॉ. धवल पटेल ने क्रैनियोटॉमी की और मस्तिष्क की सूजन को दूर किया। इलाज के दौरान डॉक्टरों द्वारा ब्रेन डेड घोषित करने के बाद परिवार ने प्रयाग के अंगों को दान करने के बारे में निर्णय लिया।
आपको बता दें कि साटो द्वारा अंगदान की प्रक्रिया के दौरान प्रयाग का एक लीवर अहमदाबाद के IKDRC को, एक किडनी अहमदाबाद के जायडस अस्पताल को, दूसरी किडनी और दिल अहमदाबाद के सिम्स हॉस्पिटल को दान किया है। चूंकि देश के विभिन्न प्रत्यारोपण अस्पतालों में बी पॉजिटिव रक्त प्रकार का कोई भी भारतीय रोगी प्रत्यारोपण के लिए तैयार नहीं है, इसलिए NOTTO द्वारा फेफड़ों का आवंटन एमजीएम चेन्नई को स्थगित कर दिया गया है जहाँ एक 23 वर्षीय सूडानी नागरिक को फेफड़ा दिया गया। अहमदाबाद के जाइडस अस्पताल में अहमदाबाद की 35 वर्षीय महिला का गुर्दा प्रत्यारोपण किया गया। अहमदाबाद के सिम्स अस्पताल में भावनगर की 30 वर्षीय महिला को दुसरे गुर्दा का प्रत्यारोपण किया गया।

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