सूरतः कोरोना के लक्षण एवं ट्रीटमेन्ट की जानकारी जरुरीः डॉ. अनूप सिंह

डॉ. अनूप सिंह

रेमडेसिविर के पीछे नहीं पड़कर पुरानी पद्धति से उपचार पर फोकस करना चाहिए

हाल में कोरोना संक्रमण देशभर में चरम पर है। सूरत सहित गुजरात भर में भी वायरस को प्रकोप जारी है। अस्पतालों से लेकर छोटे-बड़े दवाखानें मरीजों से अटे पड़े हैं। जिससे दवाएं,. इंजेक्शन, ऑक्सीजन के अलावा अस्पतालों में बेड की कमी भी बनी हुई थी। हालांकि सूरत में पिछले दो-तीन दिनों से रिकवरी दर बढ़ने से चिकित्सा जगत से जुड़े लोग राहत महसूस कर रहे हैं। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के साथ रेमडेसिविर इंजेक्शन की भारी मांग थी, जिसके लिए मरीजों के परिजन काफी परेशान हुआ करते थे। इस संदर्भ में गोडादरा क्षेत्र में हिताक्षी क्लीनिक चलाने वाले डॉ. अनूप सिंह ने अपनी बेबाक राय रखते हुए कहा कि कोरोना के सिम्टम्स पहले भी थे और आगे भी रहेंगे। यह एक प्रकार की सीजनल बीमारी समान है। इस बीमारी में कोरोना के लक्षण एवं ट्रीटमेन्ट की जानकारी होना जरुरी है। रेमडेसिविर के पीछे नहीं पड़कर पुरानी पद्धति से उपचार पर फोकस किया जाना चाह‌िए। उन्होंने कहा कि कोरोना की मियाद 14 दिनों का रहता है। दो दिन में इस बीमारी की पहचान की जाती है। इसके बाद 5-6 वें दिन यह मरीज पर अटैक करता है और 7 वें दिन से रिकवर होने लगता है। तकरीबन 80 प्रतिशत मरीज 7-8 दिन में रिकवर हो जाते हैं। जबकि 20 प्रतिशत मरीज 7- ‌8 वें दिन से रिकवर होने लगते हैं। जबकि कुछ मरीजों की हालत बिगड़ने लगती हैं, ऐसे मरीजों को अस्पताल ले जाने की जरुरत होती है। ऐसे मरीजों का 10 वां दिन टर्निंग प्वाइंट होता है और इन्हें 48 से 72 घंटे तक वेन्टीलेटर-ऑक्सीजन की आवश्कता पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि इस दरम्यान डायाबिटीस, किडनी, लीवर, बीपी जैसी गंभीर बीमारी वाले मरीजों में रिस्क रहता है और इसमें भी मात्र 2 प्रतिशत ही डेथ की संभावना रहती है। अब तक महावीर अस्पताल, बाप्स हॉस्पीटल ,निर्मल अस्पताल, उधना जनरल जैसे अस्पतालों में सेवा दे चुके डॉ. अनूप सिंह हाल में गोडादरा  क्षेत्र में अपना क्लीनिक चला रहे हैं। जहां आने वाला तकरीबन हर मरीज शतप्रतिशत स्वस्थ होकर होता है। जिसका मूल कारण बीमारियों की पहचान एवं ट्रीममेन्ट के साथ ही अच्छी कंपनियों की असली दवाएं उपलब्ध कराना है। 
कोरोना के बारे में लोगों को समझने की जरुरत
डॉ. अनूप सिंह ने कहा कि कोरोना के बारे में लोगों को समझने की जरुरत है। यदि लोग मास्क पहनने, सामाजिक दूरी एवं हाथ धोने जैसे गाइडलाइन का पालन नहीं करते हैं तो सरकार, डॉक्टर, पुलिस प्रशासन कुछ नहीं कर पाएंगे। कोरोना पांच दिन कर गले में ही रहता है। यदि प्राथमिक लक्षण के बाद ही उपचार शुरु कर दें तो अस्पताल जाने की जरुरत ही नहीं होगी। 
नकली दवाओं को लेकर चिकित्सकों को भी जागरुक होना जरुरी
नकली दवाओं के बारे में पूछे गये सवाल का जवाब देते हुए डॉ. अनूप सिंह ने कहा कि नकली एवं असली दवाओं की पहचान मरीजों को नहीं बल्कि चिकित्सकों को होता है। ऐसे में चिकित्सक जागरुक होकर उचित मेडिसीन ही मरीज को उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि मरीज के स्वस्थ होने के बाद उनके चेहरे पर झलकती खुशी ही हम चिकित्सक के लिए आशीर्वाद समान है। 

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