सूरतः स्टाइपेंड नहीं बढ़ाया तो रेजिडेंट डॉक्टर 1 मई से कोरोना का इलाज नहीं करेंगे?

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज नई सिविल अस्पताल सूरत

तीन साल पहले स्टाइपेंड बढ़ाया गया था

रेजिडेंट डॉक्टर पिछले एक साल से कोरोना के मरीजों का इलाज कर रहे हैं। रेजिडेंट डॉक्टरों ने नाराजगी जताई है कि सरकार ने नियमों के अनुसार स्टाइपेंड नहीं बढ़ाया है। रेजिडेंट डॉक्टरों द्वारा सरकार को बार-बार पेशकश करने के बावजूद स्टाइपेंड नही बढ़ाये जाने पर आखिरकार रेजीडेंट डॉक्टरों ने आगामी 1 मई से कोविड -19 अस्पताल में  ड्यूटी पर नहीं रहने का फैसला किया है। 
गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड सिविल, जूनियर डॉक्टरों एसोसिएशन के अध्यक्ष जिग्नेश गेंगडिया ने कहा कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के परिपत्र के अनुसार, रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए वजीफा (स्टाइपेंड) हर तीन साल में बढ़ाया जाता है। आखिरी बार स्टाइपेंड 2018 में बढ़ाया गया था। इसलिए हम वर्ष 2021 में वजीफे में 40% की वृद्धि चाहते हैं। अगर वह मांग 30 अप्रैल तक पूरी नहीं हुई तो हम एक मई से अपना कार्य बंद कर देंगे। मार्च 2020 में कोरोना के प्रवेश के साथ, रेजिडेंट डॉक्टरों ने अपना शैक्षणिक कार्य छोड़ दिया और रोगियों का इलाज करना शुरू कर दिया।
मेडिकल कॉलेज और सिविल के जू. डॉक्टर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष चंद्रकेश यादव ने कहा कि सरकार ने हाल ही में विशेषज्ञ डॉक्टरों को 2.5 लाख  एवं एमबीबीएस डॉक्टरों व एमडी को 1.25 लाख देने की घोषणा की है। कोरोना हॉस्पिटल में 90 प्रतिशत रेजिडेंट डॉक्टर कार्यरत हैं। सरकार का कहना है कि रेजिडेंट डॉक्टर छात्र हैं इसलिए वजीफे में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। अगर हम छात्र हैं तो हमारा काम पढ़ाई करना है। इस लिए हम स्टाइपेंड नही बढ़ाने पर कोरोना अस्पताल में ड्युटी नही करने का निर्णय किया है। 

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:


ये भी पढ़ें