सूरत : ऑक्सीजन की कमी के बीच मरीजों के इलाज के लिये हजीरा की आर्सेलर मित्तल कंपनी आगे आई

ऑक्सीजन की कमी होने पर कंपनी में मरीजों के लिए बेड की व्यवस्था की गई है। (फाइल फोटो)

कंपनी से ऑक्सीजन की आपूर्ति संभव नहीं होने से मरीजों को वहां ले जाया जाएगा

फोटो लाइन-ऑक्सीजन की कमी होने पर  कंपनी में मरीजों के लिए बेड  की व्यवस्था की गई है। (फाइल फोटो)
सूरत शहर में ऑक्सीजन की कमी पैदा हो गई है। महाराष्ट्र की कंपनी ने अपनी ऑक्सीजन की आपूर्ति में कटौती की है। जिससे बड़ी मुश्किल सर्जित हो सकती है। ऑक्सीजन का उत्पादन हजीरा स्थित आर्सेलर मित्तल में होता है। लेकिन कंपनी की सीमा यह है कि वह ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं कर सकती। इसके पीछे कुछ तकनीकी कारण हैं। ऐसी स्थिति में मरीजों को वहीं पर बेड की व्यवस्था की जाये तो  कंपनी ऑक्सीजन उपलब्ध करा सकती है। कंपनी प्रबंधकों के परामर्श से 250 बेड शुरू करने के लिए प्रशासन द्वारा पहल की गई है। हर्ष संघवी ने कहा है कि अगले दो-तीन दिनों में एक  हज़ार बेड बढ़ा दिए जाएंगे तो सूरत शहर को कुछ हद तक राहत मिलेगी।
 आर्सेलर मित्तल एक गैस बेस ऑक्सीजन प्लांट है, इसलिए ऑक्सीजन को किसी अन्य स्थान पर नहीं ले जाया जा सकता है। लेकिन अगर कोरोना का संक्रमित बेड तैयार किया जाता है, तो वहां ही ऑक्सीजन से रोगियों का इलाज किया जा सकता है। कंपनी के प्रबंधक वर्तमान में राज्य सरकार के साथ चर्चा में हैं। तब से वहां लगभग 1,000 जितना बेड वहां बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रशासन ने एक-दो दिन में 1000 बेड की व्यवस्था करने का काम शुरू कर दिया है।
सूरत शहर की वर्तमान स्थिति विकट है। सूरत शहर को स्टील कंपनी पर निर्भर रहना पड़ रहा है ऐसी स्थिति सर्जित हो रही है। एक निजी अस्पताल में ऑक्सीजन केवल 12 घंटे तक चले इतना ही है। ऐसी स्थिति में शहर में अराजकता की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। निजी अस्पताल के बाहर मरीज के परिजन अपने रिश्तेदारों को लेकर चिंतित हैं।
आइसोलेशन सेन्टर की भी कमी होगी
शहर में शुरू किए गए आइसोलेशन सेन्टर में  ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई है। अब जब निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति पर्याप्त नहीं हो रही है। आइसोलेशन सेन्टर में ऑक्सीजन पर रहने वाले रोगियों के लिए अब क्या होगा सबसे बड़ी चिंता का विषय है। आइसोलेशन सेन्टर में हजारों मरीजों को ऑक्सीजन पर रखा गया है। इस बात का कोई जवाब नहीं है कि अगर ऑक्सीजन समय पर आइसोलेशन सेंटर तक नहीं पहुंचता है तो मरीज अपना बचाव कैसे कर सकते हैं।

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