सूरतः 82 वर्षीय दादी ने महीने में दो बार कोरोना संक्रमित हुई, दोनों बार घर पर ठीक हो गई

कोरोना को हराने वाली के साथ परिजन

वराछा क्षेत्र की दादी ने कोरोना को लगातार दो बार हराया

मार्च में कोरोना से उबरने के बाद फिर अप्रैल में कोरोना हुआ
सूरत के वराछा इलाके में रहने वाली एक 82 वर्षीय दादी  महीने में दो बार कोरोना संक्रमित हुई थी। लेकिन उनके शरीर की सेहत और मज़बूत आत्मविश्वास से घर पर ही कोरोना को हराकर स्वस्थ हो गई। अपने नियमित आहार और ढलती उम्र में भी चलने की आदत के परिणामस्वरूप, इस दादी ने अच्छी सेहत बनाए रखने वाली दादी की यह बात अनेक कोरोना ग्रस्त लोगों के लिए प्रेरणादायी है। 
पालिताणा तालुका के सगापारा गाँव के मूल निवासी और वर्तमान में वराछा क्षेत्र में शिवधारा सोसायटी में अपने पोते के साथ रहने वाले 82 वर्षीय राधाबेन गगजीभाई भीकडिया को 24 मार्च को बुखार और सर्दी की शिकायत के बाद गंभीर कमजोरी हुई। स्थिति ऐसी थी कि उनके पोते नीलेश और राहुल अपनी दादी राधाबेन को इलाज के लिए एक निजी चिकित्सक के पास ले गए। जहां सीटी स्कैन सहित रिपोर्ट में कोरोना पाया गया। कोरोना से  फेफड़े पर 15 प्रतिशत प्रभावित हो चुके थे। हालांकि, राधाबेन ने अस्पताल की दवा के साथ घर पर इलाज करना उचित समझा। क्योंकि नीलेशभाई चाहते थे कि उनकी बूढ़ी दादी की घर के माहौल में अच्छी रिकवरी हो, इसलिए उन्होंने अपनी दादी को घर पर रखकर इलाज शुरू किया। ऑक्सीजन सप्लाई के साथ पौष्टिक आहार और दवा का सेवन कर 18 दिनों में राधाबेन स्वस्थ हो गई।
दादी के ठीक होने के कुछ दिनों के बाद उनके बेटे गणेशभाई ने कोरोना हुआ। साथ ही इन्हें भी पोस्ट कोरोना का भी प्रभाव पड़ा। 17 अप्रैल को, राधाबेन को उनके शरीर में कब्ज और निमोनिया का पता चला था और उन्हें कोरोना के हल्के लक्षणों का पता चला था। जिससे उसके पोते-पोतियों ने  फिर से इलाज कराया। उन्होंने एक निजी चिकित्सक से दवा ली और उसे घर पर रखा। नियमित दवा, श्वसन प्रक्रिया की निरंतर निगरानी के परिणामस्वरूप राधाबेन स्वस्थ  हुई। ढाई महीने की इस अवधि के दौरान, राधाबेन को एक अलग कमरे में रखा गया था। नियमित दवा, काढ़ा के सेवन से राधाबेन ने 7 मई को कोरोना को हराया। अब डॉक्टरों ने उसे दूसरे कमरे में जाने की अनुमति दे दी है।
82 साल के होने के बावजूद, राधाबेन अभी भी स्वस्थ हैं। उनके परिवार में 16 व्यक्ति हैं। कोरोना होने से पहले नियमित रूप से चलने की आदत थी। चलना उनकी जीवन शैली का एक हिस्सा है। भोजन भी बहुत चुस्त है। दिन में तीन बार नियमित भोजन लेती हैं। सुबह दूध  रोटी, दोपहर में दाल चावल और सब्जी -रोटी, शाम को दूध रोटी, यह उनका आहार है। नियमित और पौष्टिक आहार के कारण, राधाबेन का स्वास्थ्य बरकरार है। यही कारण है उन्होंने कोरोना को महीने में दो बार हराया है। अपनी युवावस्था में गाँव में खेती जैसी कड़ी मेहनत और परिश्रम के कारण बड़ी उम्र में भी राधाबेन ने कोरोना को  हरा दिया।

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