सुप्रीम कोर्ट का फैसला: टेक्सटाइल, हीरा सहित उद्योग को अब सर्विस का रिफंड नहीं मिलेगा

बोगस बिलिंग बढऩे की संभावना

सुप्रीम कोर्ट ने उद्योगों द्वारा ली जाने वाली किसी भी प्रकार का सर्विस का रिफंड नहीं देने का फैसला किया है। इसके कारण सबसे ज्यादा नुकसान कपड़ा, हीरा और भवननिर्माण उद्योग को होगा। वहीं अन्य उद्योगों को भी सर्विस का रिफंड बैंक खाते में जमा होने से नकदी की समस्या पैदा नहीं होती थी। जिससे अगले दिनों में बाजार में नकदी की कमी महसूस होने की संभावना है।
उद्योगों द्वारा ली जाने वाली किसी भी प्रकार की सर्विस का को रजिस्टर में बताया जाए तो उसके किए गए खर्च और चुकाया गया जीएसटी में से उद्यमी को नियम के मुताबिक सर्विस रिफंड मिलता है। जिससे उद्यमियों द्वारा जीएसटी विभाग में रिफंड के लिए अर्जी किए जाने के बाद उसे मंजूरी मिलने पर उद्यमी या व्यापारी के खाते में रूपये जमा होते है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने सर्विस का रिफंड नहीं देने का फैसजा सुनाया है। इसके कारण व्यापारियों के करोड़ों रूपए फंसने की संभावना है। ऐसे में बाजार में नकदी की भी कमी खल सकती है।
किसी व्यापारी या उद्यमियों द्वारा जॉबवर्क किया जाए या तो सर्टीफिकेट लिया जाए तो इसके लिए भुगतान किए जानेवाले चार्ज को हिसाब में बताया जाता था। इसके अलावा सीए या एकाउन्टन्ट को चुकायी जानेवाली रकम को भी रजिस्टर में बताया जाता था। जिससे व्यापारी को ऐसी रकम बताने पर अच्छी रकम बैंक खाते में रिफंड मिलती थी।  लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कारण बैंक खाते में जमा होनेवाला रिफंड नहीं मिलेगा। इसके बजाय व्यापारी के इलेक्ट्रॉनिक लेजर में यह रकम दिखायी देगी। इस रकम का उपयोग केवल टेक्स भुगतान के लिए ही कर सकेंगे। जिससे व्यापारी रूपये देख तो सकेंगे लेकिन इसका उपयोग नहीं कर सकेंगे।

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