दिल्ली हाईकोर्ट नेताओं पर सख्त; कोरोना की दवाइयों का संग्रह कर लोगों को बांट नहीं सकते, ये सेलिब्रेशन का टाइम नहीं!

Delhi High Court. (File Photo: IANS)

कोरोना की महामारी के कारण लोगों को जान बचाने के लिए आवश्यक रेमडेसिविर इंजेक्शन सहित मेडिकल साधनों की जरूरत के लिए किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में इंजेक्शन बांटने वाले कई राजनीतिक नेताओं को दिल्ली हाईकोर्ट ने फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि राजकीय नेता दवाओं का संग्रह नहीं कर सकते और ना ही लोगों को बांट सकते हैं। नेताओं के पास यदि दवा का स्टॉक हो तो उसे हेल्थ डिपार्टमेंट को जमा कर दिए जाएं।
कोर्ट ने कहा कि यह महामारी है। इसमें सेलिब्रेशन करने का समय नहीं है। दवाइयां राजनीतिक लाभ के लिए नहीं लेकिन जरूरतमंद लोगों को बांटने के लिए खरीदनी चाहिए। नेता अपने पास की दवा का स्टॉक दिल्ली सरकार के डायरेक्टर जनरल आफ हेल्थ सर्विसेज के समक्ष जमा करा दें ताकि जरूरतमंद लोगों को बांटी जा सके। इसके अलावा कोर्ट ने ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया को नोटिस भेजी है। इसमें आगामी 24 तारीख को सुनवाई होनी है। याचिकाकर्ता ने दवा बांटने वालों के खिलाफ शिकायत करने की मांग की है। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को मेडिकल माफिया और राजनेताओं के बीच सांठगांठ होने के मामले में सुनवाई शुरू की थी जिसमें कि राजनेताओं द्वारा दवाओं का संग्रह करके लोगों के बीच बांटने के मामले में सख्त रवैया अपनाया। 
प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo Credit : Pixabay.com)
दवा बांटने का अधिकार नेताओं को नहीं :  कोर्ट ने कहा कि राजनेताओं को दबाए बांटने का अधिकार नहीं है। वह दवा बांटने के नाम पर अपनी प्रतिष्ठा बना रहे हैं। कोर्ट में भाजप के सांसद गौतम गंभीर के संदर्भ में यह सवाल किया था। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को आडे हाथ लिया कहा कि राजकीय नेताओं की ओर से दवा की संग्रहखोरी की जा रही है और पुलिस इसकी अनदेखी करने का भी जिक्र किया। दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस जस्टिस विपिन त्यागी और जसमीत सिंह की बेंच ने बताया कि पुलिस को इस आरोप की जांच करने की जरूरत थी। नेता दवा बांट रहे थे तो उन्हें दवाएं कैसे मिली? यह जांच का विषय था। क्या वह दवाएं बांटने के लाइसेंस होल्डर हैं। इन लोगों के खिलाफ पुलिस क्यों चुप है। कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक नेता के मेडिकल विक्रेताओ से इतने बड़े पैमाने पर दवाएं कैसे खरीद सकते हैं। इसकी भी जांच होनी चाहिए। डीसीपी राजेश देव ने कहा कि कोर्ट ने जो सवाल पूछा है उसका जवाब देने के लिए पुलिस को समय चाहिए करेगी। पुलिस का स्टेटस रिपोर्ट मीडिया में लीक हो गया है। पुलिस जल्दी ही डिटेल में रिपोर्ट पेश करेगी।

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