जल्द ही ऑनलाइन पेमेंट के लिए नहीं देना पड़ेगा कार्ड डिटेल्स और सीवीवी, इस तरह होगा काम

प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo Credit : Pixabay.com)

आरबीआई ने 1 जनवरी 2022 से कार्ड टोकेनाइजेशन प्रणाली लागू करने की मंजूरी

आजकल अधिकांश लोग ऑनलाइन पेमेंट और ऑनलाइन शॉपिंग का उपयोग कर रहे है। ऐसे में लोग ऑनलाइन पेमेंट के लिए अपनी जानकारी कई वेबसाइट पर साझा करते है जिससे निजता की असुरक्षा होने का भय रहता है। ऐसे में एक अच्छी खबर सामने आई है। दरअसल नए साल से ऑनलाइन पेमेंट पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित होने वाला है क्योंकि ऑनलाइन पेमेंट के लिए आरबीआई ने 1 जनवरी 2022 से कार्ड टोकेनाइजेशन प्रणाली लागू करने की मंजूरी दे दी है।
आपको बता दें कि इस नई सुविधा के अनुसार ऑनलाइन पेमेंट अब टोकन सिस्टम से होगा और इसके तहत लेन-देन के  लिए आपको अपना कार्ड नंबर, सीवीवी की जानकारी साझा नहीं करनी पड़ेगी। इसके बदले एक टोकन नंबर जेनरेट कर दिया जाएगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कार्ड होल्डर की जानकारी थर्ड पार्टी के पास स्टोर नहीं होगी। आपको बता दें कि ऐसे में कई मामले सामने आए हैं, जहां पर यूजर का डाटा लीक हुआ है और उसे फ्रॉड का शिकार होना पड़ा है। आरबीआई का दावा है कि टोकनाइजेशन से इस तरह का जोखिम कम हो जाएगा।आरबीआई से मिली जानकारी के अनुसार इस सर्विस को CoFT (Permitting Card on File Toknisation) कहा जाता है। इसमें ग्राहक के लिए एक 14-16 अंकों  का टोकन जारी होगा जो कि ग्राहक के कार्ड से लिंक होगा और ग्राहक को ऑनलाइन पेमेंट करते समय महज ये टोकन की जानकारी देनी होगी। इस पूरी प्रक्रिया में कही भी कोई भी जानकारी जमा नहीं होगी जिससे धोखाधड़ी होने की संभावना कम हो जाती है।

आपको बता दें कि आरबीआई के अनुसार फिलहाल ये सुविधा मोबाइल फोन और टैबलेट के लिए ही उपलब्ध है। बाद में इसे लैपटॉप, डेस्कटॉप और वियरेबल (घड़ी, बैंड) और आईओटी डिवाइस आदि के जरिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।

आपको बता दें कि शुरुआती दौर में टोकनाइजेशन अनिवार्य नहीं रहेगा। उपभोक्ता अपनी इच्छा के अनुसार इसका इस्तेमाल कर सकेगा। यूजर को अपने कार्ड के लिए टोकन जेनरेट करने का ऑनलाइन आवेदन करना होगा। जिसके आधार पर कार्ड कंपनी निशुल्क टोकन जेनरेट करेगी। साथ ही इसमें यह भी सुविधा मिलेगी कि वह अपने कार्ड से होने वाले सभी भुगतान के लिए टोकन व्यवस्था का इस्तेमाल करें या फिर वह केवल किसी खास ट्रांजैक्शन के लिए भी टोकन जेनरेट करवा सकेगा।
ऐसे में किसी विवाद की स्थिति से निपटने के लिए आरबीआई ने पेमेंट एग्रीगेटर को सीमित मात्रा में डेटा स्टोर की अनुमति दी है। इसके लिए कार्ड के अंतिम चार नंबर और नाम की जानकारी स्टोर किया जाएगा। इसके अलावा और कोई डिटेल स्टोर नहीं रहेगी।गौरतलब है कि आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार 2019-20 में कार्ड और इंटरनेट से होने वाले फ्रॉड में 174 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इस अवधि में कुल 195 करोड़ रुपये फ्रॉड हुए थे।

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