जानकारी के लिए लोग सोशल मीडिया पर रख रहे आधार, पारंपरिक स्त्रोत और पुस्तकों को तिलांजलि

प्रतीकात्मक छवि (Photo Credit pixabay.com)

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा किये गये एक सर्वे में सामने आई रोचक जानकारी, भारत में 54% लोग अब वास्तविक जानकारी प्राप्त करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेते हैं

आज के समय सोशल मीडिया हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। हम लगभग हर काम में सोशल मीडिया पर सहारा लेने लगे है, खास कर किसी बात की जानकारी लेनी हो तो हम इंटरनेट और सोशल मीडिया का सहारा लेते है। अब ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा किये गये एक सर्वे में रोचक जानकारी सामने आई है। भारत में 54% लोग अब वास्तविक जानकारी प्राप्त करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेते हैं। यह अध्ययन मैटर ऑफ फैक्ट रिसर्च कैंपेन के तहत किया गया था, जिसमें लोग उन स्रोतों के बारे में जानकारी जानी गई जिनके द्वारा लोग किसी सत्य या वास्तविक तथ्यों के खोज करते है। एक तरफ तो ऐसे दावे हैं कि सोशल मीडिया पर आने वाली जानकारियां या तथ्य झूठे और भ्रामक हैं, तो दूसरी ओर दुनिया भर के आधे से अधिकांश उपयोगकर्ता मानते हैं कि ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर पढ़ी और साझा की गई जानकारी सच है। सबसे ज्यादा चिंता की बात ये है कि सोशल मीडिया के बढ़ते चलन से पुस्तकों और अन्य पारंपरिक स्रोतों के माध्यम से जानकारी प्राप्त करने की प्रवृत्ति में गिरावट आई है।
आपको बता दें कि आंकड़ों की बात करें तो दुनिया की 37 फीसदी आबादी सोशल मीडिया पर निर्भर है। मेक्सिकन और दक्षिण अफ्रीका के 43% और 54% भारतीय सोशल मीडिया पर निर्भर हैं। ब्रिटेन में केवल 16 प्रतिशत सोशल मीडिया पर निर्भर है। जबकि 10 में से 4 अमेरिकी सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं। भारत में 87 प्रतिशत उपयोगकर्ता मानते हैं कि सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की गई जानकारी सटीक है, जो वैश्विक औसत 75 प्रतिशत से थोड़ी अधिक है। ये अध्ययन यूके, यूएई, भारत, दक्षिण अफ्रीका और मैक्सिको में 5,000 लोगों से डेटा एकत्र करके किया गया था। 
गौरतलब है कि जब जानकारी को कल्पना से अलग करने की बात आती है, तो 52% लोग फेसबुक, यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर जानकारी की जांच करते हैं और इसे सच मानते हैं। 25-44 आयु वर्ग के युवाओं का मानना है कि सोशल मीडिया के आधार पर सूचनाओं की सत्यता की जांच की जा सकती है। भारत में 30 फीसदी लोग अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए सोशल मीडिया पर निर्भर हैं। भारत में 30 प्रतिशत माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ने के लिए सोशल मीडिया के साथ-साथ व्हाट्सएप का उपयोग करते हुए देखे गए हैं।

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