भौमाश्विनी सर्वार्थसिद्धि योग में प्रारंभ होगा आनंद नाम का नया 2078 विक्रम वर्ष

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नए वर्ष के राजा मंगल होंगे मंत्री भी मंगल होंगे; शास्येश शुक्र, दुर्गेश मंगल, धनेश शुक्र, रशेष सूर्य, रोहिणी का वास समुद्र में होगा

भारतीय वैदिक एवं ज्योतिषीय परंपरा में बताया गया है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिंदू नववर्ष का आरंभ होता है क्योंकि इसी दिन सृष्टि का आरंभ हुआ है। ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि जब सूर्य और चंद्रमा मीन राशि में एक समान अंशों पर गोचर कर रहे होते हैं तो हिंदू नववर्ष का आरंभ होता है। सामान्यतया ऐसी स्थिति प्रतिवर्ष मार्च-अप्रैल में बनती है, जब मौसम में भी सर्वत्र बदलाव आ रहा होता है। इस वर्ष 12 अप्रैल को सुबह 8 बजे भारतीय समयानुसार हिंदू नव-वर्ष की कुंडली बनेगी, जिसमें वृष लग्न उदय हो रहा है। तथा इस समय कुमार योग बनने से विद्यारंभ, साझेदारी, व्यापार आदि के विशेष संयोग। आजाद भारत की कुंडली भी वृष लग्न की है, जिसमें राहु विराजमान हैं। इस वर्ष नव-वर्ष की कुंडली में वृष लग्न में मंगल और राहु दो क्रूर ग्रह स्थित हैं, जो समाज में बेहद उथल-पुथल लाने वाले हो सकते हैं। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार नव-वर्ष का उदय लग्न उस राष्ट्र की स्थापना कुंडली के सामान हो तो वह वर्ष उस राष्ट्र विशेष के लिए ऐतिहासिक बदलाव लेकर आने वाला होता है, जैसा इस वर्ष भारत के लिए होने वाला है ।
चैत्र मास की प्रतिपदा इस वर्ष 13 अप्रैल मंगलवार के दिन होगी क्योंकि उस दिन सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि चल रही होगी अत: वर्ष का राजा ‘मंगल होगा’। संयोग से 13 अप्रैल को ही सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे जिस कारण से मंगलवार के दिन ‘मेष संक्रांति’ होने पर वर्ष के ‘मंत्री’ या ‘सेनापति’ का पद भी मंगल ग्रह की झोली में जा रहा है। ऐसा संभवता कई दशकों के बाद होने जा रहा है कि जब वर्ष के राजा और मंत्री का पद मंगल जैसे क्रूर ग्रह को मिलने जा रहा है जिसे भारतीय ज्योतिष में ‘युद्ध और उत्पात’ का कारक माना जाता है।
नवरात्र में विशेष साधना एवं देवी पूजन का फल प्राप्त होगा सर्वार्थ सिद्धि योगो में सबसे श्रेष्ठ भौमाश्विनि योग माना जाता है जोकि देवी की आराधना पूजा आदि के लिए उपयुक्त है कर्जे से दबे हुए लोग, लोन, ऋण आदि से मुक्ति के लिए भी इस नवरात्रि देवी की आराधना करें जिससे इन्हें विशेष लाभ होगा।
जनता के लिए ठीक नहीं ग्रहों का ऐसा संयोग जी हां भविष्य फल भास्कर और वर्ष प्रबोध जैसे ग्रंथों के अनुसार मंगल के राजा और मंत्री बनने पर “देश का राजा (यानि सरकार) बेहद कड़े और जनता के हितों के प्रतिकूल निर्णय लेता है। महंगाई, अग्निकांड, असामान्य वर्षा, बिजली गिरने जैसी घटनाएं अधिक होती हैं, और फसलों को नुकसान होता है। ऐसे वर्ष में लोग पित्त संबंधी रोग से अधिक परेशान होते हैं। आधुनिक मत से मंगल के राजा और मंत्री बनने पर देश में आपातकाल और युद्ध जैसे हालत बन सकते हैं।
बढ़ेगा निवेश लेकिन सीमा पर तनाव मित्रों नव वर्ष की कुंडली में लग्न में बैठे मंगल सप्तम और द्वादश स्थान के अधिपति हैं। जबकि इस वर्ष की कुंडली में लग्नेश शुक्र हैं जिनके साथ मंगल का स्थान परिवर्तन योग बन रहा है। यानी मंगल और शुक्र दोनों एक-दूसरे की राशि में होंगे। शुक्र मंगल का यह स्थान परिवर्तन भारत में जहां एक ओर विदेशी निवेश बढ़ाएगा तो वहीं विदेशी शक्तियों जैसे चीन और पाकिस्तान से टकराव भी करवा सकता है।
संवत 2078 हिंदू नव-वर्ष की कुंडली में चतुर्थ भाव के अधिपति सूर्य पंचमेश बुध तथा तीसरे घर के स्वामी चंद्र के साथ लाभ स्थान यानी एकादश भाव में राज योग बना रहे हैं जिस पर नवम भाव से शनि की दृष्टि के चलते सरकार द्वारा जन-स्वस्थ्य सेवा का विस्तार होगा और कोरोना महामारी के उपचार में तेज़ी लाई जाएगी। नवम भाव में बैठे शनि और दशम भाव में बैठे गुरु हिंदू नव-वर्ष की कुंडली में सरकार और सर्वोच्च न्यायालय द्वार कुछ ऐतिहासिक निर्णय लिए जाने के संकेत दे रहे हैं। सरकार द्वार कुछ राज्यों में विशेष व्यवस्था भी लायी जा सकती है।
इसके साथ ही उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब के कई स्थानों पर वर्षा और ओलावृष्टि हो सकती है फसलों के हानि के योग हैं दक्षिण व पूर्वी प्रांतों में तूफानी वायु, वेग, चक्रवात का भय व्याप्त रहेगा। समाजवादी विरोधी आतंकवादी तत्व बम विस्फोट, अग्निकांड आदि द्वारा भय एवं अशांति का वातावरण तैयार करेंगे। जीवन उपयोगी खाद्य वस्तुओं में विशेष महंगाई होने से साधारण जन में रोष व्याप्त होगा। शनि राहु के नव पंचक योग से अमेरिका और इंग्लैंड का अन्य महा शक्तियों के साथ मतभेद होगा। हवाएं चलेंगी लू और गर्मी का प्रकोप अधिक रहेगा।
डॉ मृत्युंजय कुमार तिवारी (विभागाध्यक्ष ज्योतिष)
श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय निंबाहेड़ा चित्तौड़गढ़ राजस्थान।

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