जानें क्या है झायडस की विराफीन दवाई, कोरोना मरीजों को कैसे पहुंचाती है लाभ

(Photo credit : news18.com)

दवा के उपयोग से मरीजों के अंदर वायरल लोड कम होगा, कोरोना के अलावा अन्य रोगों में भी सहायक होगी दवा

अहमदाबाद की फार्मास्यूटिकल कंपनी जायड्स केडीला ने कोरोना के मरीजों के लिए बनाई वीराफिन नाम की दवा का मर्यादित उपयोग करने के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने मंजूरी दे दी है। बताया जा रहा है कि कोरोना के सामान्य से मध्यम संक्रमित मरीजों को यदि इस दवा का डोज दिया जाए तो उनके उपचार में सरलता होगी इस दवा के उपयोग से मरीजों में कोम्प्लिकेशन घट जाएगा। ऑक्सीजन की आवश्यकता भी कम जाएगी। दवाइयां डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बाद ही मिलेंगी। सभी आवश्यक ट्रायल करने के बाद यह दवाइयां बनाई गई है।
दवा के उपयोग के बाद कोरोना मरीज के अंदर जल्दी रिकवरी प्रक्रिया भी शुरू होती है। कोरोना के कारण श्वसन-नली में तेजी से इंफेक्शन फैलता है लेकिन इस दवा के कारण वह संक्रमण भी घटेगा। कंपनी का दावा है कि यह दवा कोरोना के उपचार के सिवाय अन्य वायरल रोगों में भी उपयोगी साबित होगी। केडिला हेल्थकेयर लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर ने दवा के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस दवा के उपयोग से मरीजों के अंदर वायरल लोड कम होगा। कोरोना रोग के प्राथमिक चरण में दवाई दी जाए तो मरीज का उपचार सरल हो जाएगा। कोरोना फिलहाल पूरे देश में हाहाकार मचा रहा है। हम लोगों के लिए अति आवश्यक उपचार मिले यह प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दवा के तीसरे ट्रायल में कोरोना के मरीजो को दवाई देने के बाद उनके अंदर बहुत तेजी से रिकवरी देखी गई। 
प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo : IANS)
दवाई देने के 1 सप्ताह के भीतर ही कोरोना मरीजो का आरटीपीसीआर टेस्ट नेगेटिव आया। इस दवाई से मरीजों को बहुत जल्दी रिकवरी हो रही है। अन्य दवाओं की अपेक्षा यह दवा ज्यादा असरकारक है। हम लोगों के अंदर वायरस का प्रतिकार करने वाले कोष को टाइप वन इन्फेरोन कहते हैं। इंफेक्शन के बाद वायरस द्वारा जो हमला होता है उसके असफल बनाने के लिए लिए पेजिरेटेड इन्फ्रारेन अल्फा का डोज देने के बाद 7 दिन में ही रिपोर्ट नेगेटिव आया था। यदि दूसरे चरण में वीराफिन का उपयोग पहले किया जाए तो मरीज को ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है। उम्र के साथ लोगों में शरीर में इन्फ्रारेन अल्फा उत्पन्न करने की क्षमता घट जाती है, लेकिन इस दवा के उपयोग के बाद इन्फ्रारेन अल्फा के कम होने की संभावना घट जाती है। इससे इन्फ्रारेन अल्फा बने रहते हैं। जो कि रोग प्रतिकारक शक्ति बढाते हैं।

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