भगवान कृष्ण से जानिए कर्म का सिद्धांत और जीवन का रहस्य

प्रतिकारात्मक तस्वीर (Photo: pixabay..com)

कौन है कृष्ण और क्या सिखाता है कृष्ण का व्यक्तित्व

भगवान कृष्ण का व्यक्तित्व देखकर आश्चर्य होता है कि आखिर कृष्ण हैं कौन? कृष्ण केवल भगवान नहीं हैं, कृष्ण मित्र हैं, सुदामा और द्रौपदी के मित्र हैं। कृष्ण प्रेमी हैं, कृष्ण गोपियों और भक्तों के प्रेम है। कृष्ण के प्रेम में दुनिया भुला देने की शक्ति है । कृष्ण जगद्गुरु हैं। एक गुरु जिसकी प्रतीक्षा पूरी दुनिया कर रही है। कृष्ण प्रबंधन गुरु हैं। कृष्ण सिखाते हैं कि कब कहाँ, क्या, और कैसे होना चाहिए।
कृष्ण एक सच्चे नेता हैं जो महाभारत युद्ध के दौरान निराश अर्जुन को प्रेरित करते हैं और उसे धर्मयुद्ध लड़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। कभी-कभी प्रश्न उठता है, कृष्ण क्या नहीं हैं? जवाब है कि कृष्ण ही सब कुछ हैं । कृष्ण में सब कुछ है, इसलिए कृष्ण को पूर्ण पुरुषोत्तम कहा जाता है। कृष्ण उत्कृष्ट हैं और परिपूर्ण भी।
दुनिया में शायद ही कोई ऐसी मां होगी जिसने अपने बेटे को कभी कान्हा, गोपाल, लाला या मोहन न कहा हो! अधिकांश माताएं अपने बेटें को कम से कम एक बार सिर पर मुकुट में मोर पंख, पीले वस्त्र और हाथ में बांसुरी धारण कराकर कृष्ण जरुर बनाती है। कृष्ण की सुंदरता यह है कि हम उन्हें अपना मानते हैं।
कृष्ण ही एकमात्र भगवान हैं जो उधम करते हैं, प्यार करते हैं, लड़ते हैं और यहां तक कि तार्किक तर्क भी देते हैं कि वे जो करते हैं वह सच क्यों है। कृष्ण धर्म और सत्य को सबसे पहले रखते हुए कहते हैं कि जब सत्य की बात आती है तो अपने रिश्तेदारों से भी लड़ना चाहिए। सच्चाई रिश्तेदारी से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

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